अकबर का उत्तराधिकारी उसका पुत्र सलीम हुआ। जो 3 नवम्बर 1605 ई0 को नूरूद्दीन मुहम्मद जहाँगीर बादशाहगाजी की उपाधि धारण कर गद्दी पर बैठा। जहाँगीर का पहला विवाह मानसिंह की बहन मानबाई (शाहबेगम) से हुआ। इसने अफीम खाकर आत्महत्या कर लिया था। इससे खुसरो पैदा हुआ था।
जहाँगीर का दूसरा विवाह उदय सिंह की पुत्री जगत गोसाई (जोधाबाई, मलिका-ए-जहां) से हुआ। जिससे शाहजहाँ का जन्म हुआ। साहिबे-जगल से शाहजादा परवेज का जन्म हुआ था।
जहाँगीर ने कश्मीर में शालीमार एवं निशांतबाग का निर्माण करवाया था।
जहाँगीर ने अपने साम्राज्य में तम्बाकू के प्रयोग पर प्रतिबन्ध लगा दिया था।
जहाँगीर को न्याय की जंजीर के लिये याद किया जाता है।
जहाँगीर ने अपनी आत्मकथा तुजुके जहाँगीरी कि शुरूआत किया जिसे पूरा करने का श्रेय मोतमिद खाँ को है।
जहाँगीर एवं उसके पुत्र खुसरों का युद्व भैरोवल नामक मैदान में हुआ था।
खुसरों की सहायता करने के कारण जहाँगीर ने सिक्खोंें के 5वें गुरू अर्जुनेदव को फाँसी दिलवा दी थी।
जहाँगीर के समय में 1615 ई0 में मुगल-मेवाड़ सन्धि हुई।
अहमदनगर के वजीर मलिक अम्बर के विरूद्व सफलता से खुश होकर जहाँगीर ने अपने पुत्र खुर्रम को शाहजहाँ की उपािध प्रदान की।
जहाँगीर ने नूरजहाँ के पिता गयासबेग को शाही दीवान बनाया एवं इत्माद उद्दौला की उपाधि प्रदान की।
-शेष अगले भाग में