नूरजहाँ की माँ अस्मत बेगम ने गुलाब से इत्र निकालने की विधि खोजी थी।
7 नवम्बर 1627 ई0 को भीमवार नामक स्थान पर जहाँगीर की मृत्यु हो गयी उसे शहादरा (लाहौर) में रावी नदी के तट पर दफनाया गया। जहाँगीर दमा रोग से पीड़ित था।
जहाँगीर ने वृहस्पतिवार एवं रविवार को पशुवद्ध निषिध कर दिया था।
जहाँगीर के समय में मुगल चित्र कला अपने चरमोत्कर्ष पर पहुॅची।
जहाँगीर ने प्रसिद्ध चित्रकारों उस्ताद मंसूर को नादिर उल अस्र एवं अबुल हसन को नादिर उल जमा की उपाधि प्रदान की।
तुजुके जहाँगीरी के आवरण पृष्ठ के लिए अबुल हसन ने चित्र बनाया था।
जहाँगीर ने चित्रकार बिशन दास को फारस के शासक के चित्र बनाने के लिए भेजा था।
इतमादउद्दौला का मकबरा पूर्णतः संगमरमर से निर्मित पहला मुगल कालीन इमारत है। इसका निर्माण उसकी बेटी नूरजहाँ ने करवाया था।
इसी इमारत में पित्रादुरा नामक जड़ाऊकाम(पत्थर पर कढ़ाई) का पहली बार प्रयोग किया गया।
जहाँगीर के शासन काल में विलियम हाकिन्स (1608 ई0), टामस रो (1615) एडवर्ड टेरी एवं विलियम फिन्च जैसे यूरोपीय आये थे।
जहाँगीर ने विलियम हाकिन्स को 400 जात का मनसब प्रदान किया था। यह तुर्की एवं फारसी भाषा बोल सकता था।
ब्रितानी शासक जार्ज प्रथम के दूत के रूप में सर टामस रो जहाँगीर के दरबार में एक शिष्टमंडल के साथ उपस्थित हुआ था। यह अजमेर में जहाँगीर से मिला था।