वैश्वीकरण से तात्पर्य

किसी अर्थव्यवस्था के विश्व की अर्थव्यवस्था में एकीकरण को वैश्वीकरण कहते हैं। यह तभी सम्भव है जब विश्व के देशों के बीच वस्तुओ, तकनीक तथा निवेश का मुक्त आदान प्रदान हो । अनेक वस्तुओं पर आयात कर बहुत कम कर दिए जाते हैं ताकि उन्हें आयात निर्यात करने में कोई कठिनाई न हो। जो विदेशी कंपनिया भारत में निवेश करती हैं अथवा यहां उद्योग लगाती हैं उनको अनेक रियायतें दी जाती हैं।

      दूसरे शब्दों में , "वैश्वीकरण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा विश्व बाजारों के मध्य  पारस्परिक निर्भरता उत्पन्न होती है और व्यापार देश की सीमाओं में प्रतिबंधित न होकर विश्व व्यापार में निहित तुलनात्मक लागत लाभ दशाओ का विदोहन करने की दिशा में अग्रसर होता  है।" अथवा देश की अर्थव्यवस्था के साथ एकीकृत कर देना सार्वभौमिकरण कहलाता है। भारत के संदर्भ में सार्वभौमिकरण के अंतर्गत निम्नलिखित तथ्य सम्मिलित हैं :-

  1. भारत के विभिन्न आर्थिक व्यवसायों में विदेशी पूंजी निवेश को छूट प्रदान करना ।
  2. विदेशी विनिमय नियंत्रण अधिनियमो को समाप्त कर भारत में बहुराष्ट्रीय कम्पनियों को विदेशी निवेश करने की सुविधा देना।
  3. भारतीय कम्पनियो को विदेशी कंपनियों के साथ सहयोग करने की अनुमति प्रदान करना।
  4. विदेशो में संयुक्त परियोजनाओं के संचालन को प्रोत्साहित करना।
  5. आयात उदारीकरण प्रक्रिया करना।
  6. विनिमय दर में लगातार मूल्य ह्रास द्वारा भारतीय निर्यातों को प्रोत्साहित करना।

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