संस्थापक -- डा आत्माराम पाण्डुरंग
स्थापना --- 1867 ई. ( मुम्बई )
केशव चन्द्र सेन से प्रभावित होकर आत्माराम पाण्डुरंग ने 1867 ई. में ' प्रार्थना समाज ' की स्थापना की ।
महादेव गोविंद राणाडे तथा जी . आर. भण्डारकर इस समाज के प्रमुख अग्रणी नेताओ में से थे ।
महादेव गोविंद राणाडे 1869 ई. में प्रार्थना समाज के सदस्य बने ।राणाडे को पश्चिमी भारत में सांस्कृतिक पुनर्जागरण का अग्रदूत तथा महाराष्ट्र का सुकरात भी कहा जाता है ।
राणाडे ने 1871 ई. में ' सार्वजनिक समाज ' की स्थापना की ।इन्होंने बाल विवाह, छूआ - छूत, जातिगत संकीर्णता आदि का विरोध किया तथा विधवा स्त्री शिक्षा आदि का समर्थन किया ।राणाडे ने ' एक आस्तिक की धर्म में आस्था ' नामक पुस्तक लिखी ।
भारतीयों में शिक्षा के प्रसार तथा अज्ञानता के विनाश के उद्देश्य से राणाडे ने 1884 ई. में ' दक्कन एजुकेशनल सोसाइटी ' की स्थापना की ।
दक्कन एजुकेशनल सोसाइटी के सदस्यों में तिलक गोखले और आगरकर शामिल थे । 1891 ई. में राणाडे ने महाराष्ट्र में विडो रिमैरेज एसोसिएशन की स्थापना की ।
पण्डिता रमा बाई ने आर्य महिला समाज की स्थापना में महत्वपूर्ण योगदान दिया । 1899 ई. में प्रो. डी. के. कावै ने पूना में विडो होम की स्थापना की ।इन्होंने 1906 ई. में बम्बई में इंडियन वोमेन्स यूनिवर्सिटी की स्थापना की ।
प्रार्थना समाज के अनुयायियों ने विधवा आश्रम अछूतोद्धार शिक्षा के लिए रात्रि पाठशाला आदि समाज सेवी संस्थाए शुरू की ।प्रार्थना समाज ने महाराष्ट्र में वहीं काम किया, जो बंगाल में ब्रह्म समाज ने किया ।