भारत में वैश्वीकरण

भारत में सार्वभौमिकरण की प्रक्रिया को जुलाई सन 1991 में उस समय बल मिला , जब अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष तथा विश्व बैंक ने भारत सरकार पर इस प्रक्रिया को लागू करने के लिए दबाव डाला । जुलाई 1991में भारत सरकार द्वारा अपनायी गयी आर्थिक नीति तथा उसके बाद के आर्थिक बजटों में जो उदारीकरण नीति लागू की गई , वह भी सार्वभौमिकरण की ओर उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम था।

       अर्थशास्त्रियों  का मत है कि सन 1990-91 के दौरान भारत के गम्भीर आर्थिक संकट ने भारत सरकार को विवश कर दिया कि वह अन्तर्राष्ट्रीय  मुद्रा कोष तथा विश्व बैंक द्वारा प्रस्तावित स्थ्ययित्व एवं संरचनात्मक समायोजन कार्यक्रम देेेश में  लागू करे।

विशेषतायें :-सार्वभौमिकरण या वैश्वीकरण में प्रमुख रूप से निम्न चार विशेषताए सम्मिलित हैं:-

  1. आर्थिक क्रियाओं का विस्तार राष्ट्रीय सीमाओं से परे बिना किसी प्रतिबंध के होने लगता है अर्थात विश्व अर्थव्यवस्था एकीकृत हो जाती है।
  2. वस्तुओं, सेवाओ , तकनीक ,पूंजी और श्रम सम्बन्धी क्रियाओं का भी विश्व व्यापार में एकीकरण हो जाता है
  3. बहुराष्ट्रीय कंपनियो का प्रभुत्व बढ़ जाता है।
  4. देश की स्वयं की राष्ट्रीय आर्थिक नीतियों का प्रभाव कम होता है।
Posted on by