आर्द्र भूमि

जलग्रस्त या आर्द्र भूमि अति उपयोगी संसाधनों में से एक है । जहां पूरे साल या वर्ष के एक भाग में पानी का जमाव रहता है आर्द्र भूमि के रामसार सम्मेलन के अनुसार आर्द्र भूमि वैसे दलदली या पानी वाले क्षेत्र हैं जहां सालो भर या साल के एक हिस्से में प्राकृतिक या कृत्रिम रूप से शांत या बहता हुआ मीठा या खारा पानी वाला समुद्री या गैर समुद्री क्षेत्र जिसकी गहराई 6 मी से अधिक नही होती।

आर्द्र भूमि का महत्व :-

 आर्द्र भूमि क्षेत्र कई दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं -

  1. ये पक्षियों , जन्तुओ कीटो तथा पौधों की कई दुर्लभ प्रजातियों के निवास स्थान होते हैं।
  2. यहाँ अनेक प्रवासी पक्षी तथा जल वाले पक्षी मिलते हैं।
  3. परिस्थितिकी व्यवस्था के रूप में पोषक तत्वों के पुनर्निर्माण, अधिशेष नाइट्रोजन के निष्काषन , फास्फेट का निष्क्रिय करने वाले जहरीले तत्वों , रसायनों तथा भारी धातुओं का पौधों के अवशोषण द्वारा निष्पादन तथा गन्दे फालतू जल के शुद्धिकरण में उपयोगी है।
  4. अवसादों का अवरोध कर नदियों में गाद के जमाव को कम करते हैं।
  5. ये बाढ़ के पानी को समेटकर उसके प्रभाव को कम करते हैं तथा जल की धारा को धीरे करके मिट्टी के अपरदन को रोकते हैं।
  6. विनाशकारी समुद्री तुफानो के लिए समुद्री प्रदेश वाली जलग्रस्त भूमि अवरोधक का कार्य करती है।
  7. ये भूमिगत जल तथा खारे जल को मिलने से रोकते हैं जिससे उस स्थान पर एक सूक्ष्म जलवायु का निर्माण होता है।
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