मानवेंद्र नाथ राय --- 1887 ई. में जन्मे प्रमुख राष्ट्रवादी, जिन्होंने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान क्रांतिकारी संगठनों को विदेशों से धन व हथियारों की तस्करी में सहयोग दिया ।ये 1912 में हावड़ा षडयंत्र केस में गिरफ्तार कर लिए गए ।लेनिन व ट्राटस्की के सम्पर्क में आकर कम्युनिस्ट हो गए ।
भारत में ' कम्युनिस्ट पार्टी ' की स्थापना में इनका महत्वपूर्ण योगदान रहा ।1922 में बर्लिन से ' द लैंगार्ड ऑफ इंडियन इंडिपेंडेंस ' नामक समाचार पत्र निकाला ।कानपुर षड्यंत्र केस में इन्हें छः वर्ष की सजा हुई । 1936 में कांग्रेस में आ गए तथा इंडिपेंडेंट इंडिया समाचार पत्र निकाला । 1954 में इनका निधन हो गया ।
मैडम भीकाजी रूस्तमजी कामा --- 1861 ई. में सम्पन्न पारसी परिवार में जन्मी भीकाजी आगे चलकर भारतीय स्वाधीनता आंदोलन में शामिल हो गई ।पेरिस में ' वन्देमातरम् ' नामक पत्र का सम्पादन किया ।फ्रांस सरकार ने 1941 में इनके समाचार पत्र पर प्रतिबंध लगा दिया, लेकिन इनकी गतिविधियां जारी रहीं । 1936 में इनका निधन हो गया ।
पतंजलि ---- संस्कृत का महान विद्वान व भारत का सुप्रसिद्ध दार्शनिक, जिसने प्राकृत के विकास के रूप में संस्कृत प्रस्तुत किया ।वे शुंग वंश के समकालीन थे ।इन्होंने ' योगसूत्रा ' नामक ग्रन्थ लिखा ।
पाणिनी--- ईसा पूर्व चौथी या पांचवी शताब्दी के गान्धार के महान संस्कृत व्याकरण आचार्य, जिनकी रचना ' अष्टाध्यायी ' संस्कृत व्याकरण शास्त्रा का प्रारंभिक सूत्र ग्रंथ माना जाता है ।
मनु--- हिन्दू समाज के विधि - विधान का निर्माता मनु को माना जाता हैं ।उन्होंने ' मनुस्मृति ' की रचना की ।मनु आदि पुरूष भी माने जाते हैं ।
माधवाचार्य--- 13 वीं शताब्दी में दक्षिण भारत में कर्नाटक के उडुपी नामक स्थान पर जन्मे एक प्रसिद्ध विद्वान व दार्शनिक, जिन्होंने ' द्वैतवाद ' का प्रचार किया । उन्होंने सर्वदर्शन संग्रह नामक ग्रन्थ की रचना भी की ।