जलवायु परिवर्तन पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन की संस्तुतियां (भाग -1)

  • जलवायु परिवर्तन मात्र वैज्ञानिक समस्या न होकर सार्वभौमिक बन गयी है।
  • हमें अच्छे नीति निर्देशो की आवश्यकता है।
  • वैश्विक हस्तक्षेप भी आवश्यक है।
  • सशक्त राजनैतिक कदम की भी आवश्यकता है।
  • जनता की भूमिका- यह आवश्यक है तथा प्रत्येक नागरिक के एजेन्डा का हिस्सा बननी चाहिए।
  • हमे पवित्र पथ की ओर देखना  चाहिए।
  • अपनी अवसंरचना को बांटना भी आवश्यक है।
  • राज्य स्तर पर तथा उसके आगे क्षेत्रीय स्तर पर निकट सहयोग अपेक्षित है।
  • बहुस्तर पर अध्य्यन आवश्यक है समुचित डेटाबेस विकास जो शैक्षिक अनुसंधान तथा  शिक्षा समर्थित है, के साथ न्यूनीकरण पर अच्छे सुझाव।
  • जलवायु परिवर्तन न्यूनीकरण में कार्यकारी विधि उत्कृष्ट ढंग से नियंत्रण के लिए अनुप्रयुक्त।
  • बहुअनुशासनिक पहुंच की आवश्यकता जिसमें विस्तीर्ण रूप से समाज, कृषक, गैरसरकारी संगठन, स्वस्थ्य प्राधिकरण सम्मिलित है, को उत्तरदायित्व देना।
  • सभी इच्छुक लोगों के लिए सिटीजन चार्टर भी एक सुझाव था।
  • विदेश मंत्रालय द्वारा वैश्विक अनुकूलन नीति लाने तथा उसे राज्य  स्तर पर  कार्यान्वित करने की आवश्यकता होती है।
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