जलवायु परिवर्तन पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन (भाग-2)

  • जलवायु परिवर्तन पर अतिरिक्त मीडिया लाइन का विकास करना - जो हमारे मुद्दों तथा समाधानों की पूर्ति के लिए एक मंच का कार्य करेगी।
  • विश्वविद्यालय अनुदान आयोग द्वारा सभी स्तरों पर जलवायु परिवर्तन पर अनिवार्य कार्यक्रम लाना।
  • सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ क्लाइमेट चेंज की स्थापना का सुझाव।
  • डाटा संग्रहण तथा डाटाबेस निर्माण की नियमित विधि को परिवर्तित कर दीर्घावधि रूप से मुद्दों के निराकरण हेतु।
  • डाटा संग्रहन तथा आधार विकास पर श्रेष्ठ प्रोटोकॉल।
  • नेटवर्क जो आज कल चर्चा का  विषय है तथा उनको एकीकृत करने की आवश्यकता है।
  • प्राकृतिक तथा राष्ट्रीय संसोधन को समझने तथा मात्रात्मक वाले अनुसंधान तथा ऊर्जा के वैकल्पिक स्रोतों का विकास करने वाले अनुसंधान पर जोर डालना।
  • सरकार द्वारा निधित्व- टेक्नोलॉजी हब का वर्धन तथा विकास भी एक विचार था।
  •  भारत क्लाइमेट चेंज सन्धि का हस्ताक्षरकर्ता नही है । हम इस मुद्दे का सामना कैसे करेंगे हमे स्वंय निर्णय लेना होगा।
  • एकीकृत अनुसन्धान निर्गत , जलवायु परिवर्तन पर हमारी समझ तथा परस्पर प्रक्रियाओं को विकसित करना।
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