वन नीति

भारत में सबसे पहले ब्रिटिश सरकार ने 1894 में एक वन नीति अपनाई। लेकिन स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात एक नवीन नीति की आवश्यकता अनुभव की जाने लगी। अतः 1954 को केंद्रीय सरकार ने वनों के सम्बंध में एक नवीन नीति की घोषणा की। लेकिन यह नीति अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने में असफल रही। अतः 7 दिसम्बर , 1988 को नवीन वन नीति घोषित की गई है जिसके  तीन लक्ष्य हैं :-

  1.  पर्यावरण स्थिरता,
  2. जीव जंतुओं तथा वनस्पति जैसी प्राकृतिक धरोहर की हिफाजत करना।
  3. लोगो की बुनियादी जरूरतों को पूरा करना।

इन उद्देश्यों की पूर्ति के लिए इस वन नीति में निम्न बातें कही गयी हैं :-

  • पहाड़ी घाटियों व नदियों के जल ग्रहण क्षेत्रो में वन बढ़ाये  जाएंगे।
  • वनों पर आदिवासियों और गरीबो के पारस्परिक हक बनाये रखे जाएंगे।
  • वनों की उत्पादकता बढ़ाये जाने पर ध्यान दिया जायेगा।
  • वर्तमान वनों की कटाई को कम किया जायेगा। जिससे कि पर्यावरण का संतुलन बनाए रखा जा सके।
  • उद्योगों की रियायती दर पर वन के उत्पाद प्राप्त करने पर रोक लगाई जाएगी।
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