संविधान के 42 वें संशोधन के द्वारा,अन्य बातों के साथ-साथ मूल कर्तव्य" शीर्षक के अंतर्गत संविधान में एक नया भाग छोड़ा गया । इसमें भारत के सभी नागरिकों के लिए 11 कर्तव्यों की एक संहिता निर्धारित की गई हैं । वस्तुयता कोई भी अधिकारी पद अनुरूप कर्तव्य के बिना व्यवहार नहीं हो सकता तथा राज्य की और नागरिक के राजनीतिक दायित्व के प्रति सम्मान के बिना नागरिक के अधिकारों का कोई अर्थ नहीं है । यह दुर्भाग्य की बात है । कि नागरिकों के मूल कर्तव्य की संहीता को हमने अभी तक वह महत्व नहीं दिया है जो इसे मिलना चाहिए ।