भारत के संविधान में एक स्वतंत्र न्यायपालिका की व्यवस्था की गई है l उसे न्यायिक पुनरीक्षण की शक्ति प्रदान की गई है । उच्च न्यायालय तथा उच्चतम न्यायालय एक ही एकीकृत न्यायिक संरचना के अंग है और इसका अधिकार क्षेत्र सभी वीधियो यानी संघ राज्य सिविल दंडनीय संवैधानिक विधियों पर होता है ।अमेरिका की तरह हमारे देश में पृथक संघीय तथा राज्य प्रणाली नहीं है । संपूर्ण न्यायपालिका न्यायालयों का श्रेणीबद्ध संगठन है। वह न केवल व्यक्तिगत अधिकारों तथा स्वतंत्रता के अभीरक्षक के रूप में विवादो तथा कृतियों का न्यायनिर्णयन करता है बल्कि उससे अपेक्षा की जा सकती है कि वह समय-समय पर संविधान का निर्वाचन करें तथा संविधान के संदर्भ में किसी विधान की वैधता का निर्धारण करने के लिए उसका पुनरीक्षण करे उच्चतम न्यायालय का निर्णय देश की सर्वोपरि विधि होता है उच्चतम न्यायालय राज्यों के बीच अथवा संघ तथा राज्यों के बीच अधिकार क्षेत्र तथा शक्तियों के वितरण के संबंध में उत्पन्न विवादों के विवाच का कार्य भी करता है ।