यह विवाद कर्नाटक , तमिलनाडु तथा केरल राज्यो के मध्य कावेरी जल के बंटवारे को लेकर दशकों पुराने कावेरी जल विवाद को सुलझाने के लिए 2 जून 1990 को गठित कावेरी जल विवाद पंचाट ने 16 वर्षो के बाद 5 फरवरी 2007 को अपना अंतिम फैसला सुना दिया । इसके साथ ही दक्षिण भारत के तीन राज्यो तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल तथा एक केंद्रशासित प्रदेश पुडुचेरी के बीच दीर्घकाल से चल आ रहा है और एक हद तक आपसी वैमनस्यता का रूप ले चुका यह जल विवाद अब एक नए गुणात्मक दौर में पहुंच चुका है।
फैसले के महत्वपूर्ण बिन्दु :-
- एक सामान्य जल वर्ष (1 जून से 31 मई) में कावेरी बेसिन में उपलब्ध 740 अरब घन फुट पुडुचेरी को 7 अरब घन पानी आवंटित किया जायेगा।
- पर्यावरण हित को ध्यान में रखते हुए 10 अरब घन फुट पानी आरक्षित रखा गया है ताकि जलीय जीव जंतु और वनस्पति संरक्षित रहे। इसके साथ ही 4 अरब घन फुट पानी अनिवार्य रूप से समुद्र में छोड़ा जाना निश्चित किया गया है।
- पानी के बंटवारे पर निगरानी रखने के लिए अंतरराज्यीय सम्पर्क बिंदुओं को चिन्हित किया गया है।
- कावेरी बेसिन में पानी कम रहने पर चारों राज्यों का हिस्सा उसी अनुपात में बराबर बराबर घट जाएगा, जिस अनुपात में पानी का वर्तमान बंटवारा किया गया है।
- किसी भी राज्य सीमा क्षेत्र के अंदर किसी व्यक्ति या इकाई द्वारा पानी के इस्तेमाल व सम्बंधित राज्य द्वारा किया गया इस्तेमाल मन जायेगा।