साझेदारी खाते

  1. पूंजी खाता ( capital account) - - साझेदार द्वारा लाई गई पूंजी क्रेडिट में लिखी जाती है किसी भी पर समझौते के अभाव में पूंजी खाता अचल या स्थिर  माना जाता है।  यदि साझेदारी में समझौता हो जाए तो लाभ हानि या वा आहरण की रखमें भी पूंजी खाते में हस्तांतरित कर देते हैं। ऐसे  पूजी खाता चल या अस्थायी या परिवर्तनशील कहे जाते हैं।
  2. चालू खाता (Current Account ) - पूंजी खाते को स्थिर रखने के लिए चालू खाता खोला जाता है। इसके डेबिट में आहरण आहरण पर ब्याज प्रॉफिट एंड लॉस की हानि को दिखाते हैं। क्रेडिट में प्रारंभिक शेष प्रॉफिट और लॉस का लाभ पूंजी पर ब्याज दिखाते हैं। यदि पूंजी खाते के स्थाई रखने का फैसला हो तो उसे (पूंजी) छोडकर अन्य सभी लेखें  इसमें करते हैं।
  3. ऋण खाता (loan account) - यदि साझेदार से फर्म ने ऋण प्राप्त किया है तो ऋण की रकम पूंजी खाते में लिखकर अलग से खाता खोलकर क्रेडिट करेंगे। समझौते के अभाव में 6% वार्षिक दर से ब्याज का प्रावधान है।
  4. आहरण खाता (Drawing Account) - यदि फर्म के साझेदार बहुत बार आहरण करते हैं , तो पृथक आहरण खाता खोला जाता है। खाता बंद करने पर समस्त राशि चालू खाते में हस्तांतरित कर देते हैं।
  5. पूंजी पर ब्याज (Interest on Capital) - जब तक  सलेख में कोई विपरीत समझौता ना हो, पूंजी पर कोई ब्याज नहीं दिया जाता है।
  6. लाभ हानि विभाजन (Sharing profit and loss)- विपरित अनुबंध के आधार पर साझेदारों में लाभ हानि बराबर बांटा जाएगा। अन्यथा वर्णित दर से लाभ विभाजन करते हैं। 
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