राष्ट्रीय पर्यावरण नीति 2006

  • महत्वपूर्ण पर्यावरणीय संसाधनों का संरक्षण।
  • गरीबी के लिए स्वतंत्र कार्यक्रम जिसमे वर्तमान पीढ़ी में समता स्थापित की जा सके । 
  • वर्तमान एवं भावी पीढ़ियों के मध्य न्यायोचित बंटवारा ।
  • आर्थिक तथा सामाजिक विकास में पर्यावरणीय सरोकारों का एकीकरण 
  •  पर्यावरणीय संसाधनों के प्रयोग में दक्षता हासिल करना।
  • पर्यावरणीय संसाधनों के प्रयोग के प्रबंधन एवं विनियमन के संदर्भ में बेहतर संचालन ।
  • पर्यावरण संरक्षण हेतु संसाधनों में बढोत्तरी।
  • राष्ट्र पर्यावरण नीति के अंतर्गत ही उपरोक्त उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए कुछ सिद्धान्त भी स्वीकार किए गए हैं, जिन्हें निम्न बिंदुओं के अंतर्गत समझा जा सकता है।
  • किसी भी विकास का केंद्र बिंदु मानव ही है और उसे प्रवृति के साथ तालमेल रखते हुए स्वस्थ एवं गतिशील जीवन जीने का हक भी है।
  • वर्तमान एवं भविष्य की विकासात्मक एवं पर्यावरणीय आवश्यकताओं को समझते हुए मानव का विकास पर अपना अधिकार है।
  •  पर्यावरणीय सुरक्षा विकास की प्रक्रिया का ही अभिन्न अंग है और उसे विकास से अलग करके नही देखा जा सकता है।
  • कुछ चीजें अतुल्य महत्व की होती हैं जैसे मानव स्वास्थ्य , मानव के मध्य समता एवं न्याय इनको किसी भी स्थिति में नष्ट नही किया जाना चाहिए।
  • सरकार पर्यावरण की स्वामी नही है बल्कि वह इसकी दृष्टि है इसका उपयोग समाज द्वारा, समाज के लिए किया जाना है। इसलिए इसकी सुरक्षा का भार भी मात्र सरकार का नही बल्कि सम्पूर्ण  समाज का है।
  • इस पर्यावरण नीति से बिल्कुल स्पष्ट है कि एक ओर जहां पर्यावरणीय नीति के तीनों आयामो को पुष्ट किया गया है तो  वही इसके वृहद उद्देश्य "संपोषणीय सतत विकास" की नीति पर चलने का भी प्रयास किया गया है
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