बंगाल में इस आन्दोलन के प्रवर्तक एंग्लो- इण्डियन युवक हेनरी विवियन डेरेजियो थे । 1809 ई. में जन्मे डेरेजियो 1826 ई. में एक घड़ी विक्रेता रूप में कलकत्ता आये ।डेरेजियो 1826-31 ई. तक कोलकाता के हिन्दू कालेज में इतिहास के शिक्षक के रूप में कार्य किया ।
सामाजिक चेतना का सबसे उग्र रूप इनमें प्रगट हुआ ।
डेरेजियो ने छात्रों को विवेकपूर्ण ढंग से सोचने, स्वतंत्रता सभी सद्गुणों को अपनाने एवं सत्य का आचरण करने के लिए प्रेरित किया ।
अत्यधिक उन्नति तथा सामाजिक सुधारों के लिए इन्होंने एकैडमिक ऐसोसिएशन तथा सोसायटी कार ' दी एक्जीबिशन ऑफ जनरल नॉलेज ' जैसे संगठनों की स्थापना की ।इसके अतिरिक्त इन्होंने एंग्लो - इण्डियन हिन्दू एसोसिएशन ' बंग हित सभा ' तथा डिबेटिंग क्लब नामक संस्थाओ की स्थापना की ।
यंग बंगाल आन्दोलन के मुख्य मुद्दे थे - प्रेस की स्वतंत्रता, सरकारी उच्च सेवाओं में भारतीयों की नियुक्ति, जमींदारों के अत्याचारों से रैयतों की सुरक्षा आदि इन्होंने नारी शिक्षा अधिकारों की जोरदार मांग की तथा समाज में फैले आडम्बरो का विरोध किया ।
डेरेजियो के मुख्य शिष्यों में कृष्ण मोहन बनर्जी, रामगोपाल घोष, महेश चन्द्र घोष, दक्षिणानंद मुखर्जी आदि थे ।
सुरेंद्र नाथ बनर्जी ने डेरेजियो को ' बंगाल में आधुनिक सभ्यता का अग्रदूत ' तथा ' हमारी जाति के पिता ' कहा है ।
सत्य का अनुसरण करने वालों में डेरेजियो की तुलना सुकरात से की घाती है ।डेरेजियो को आधुनिक भारत का प्रथम राष्ट्रवादी कवि भी कहा जाता है ।