वाष्पोत्सर्जन (transpiration) पौधे के वायवीय भागों से जल का वाष्प के रूप में उड़ना वाष्पोत्सर्जन कहलाता है । दूसरे शब्दों में वाष्पउत्सर्जन वह क्रिया है, जिसमें पादप सतह से जल वास्तु के रूप में उड़ता है। जल पौधों में अस्थाई होता है जल की पर्याप्त मात्रा वाष्प के रूप में पत्ती के निम्नलिखित सत्ता पर उपस्थित रंध्र के माध्यम से निष्कासित हो जाती है पत्ती में वाष्प उत्सर्जन द्वारा हुई जल की हानि क्षतिपूर्ति जड़ से परिवहन द्वारा हुई नई आपूर्ति द्वारा होती रहती है ।वास्तव में पत्ती की कोशिका से जल के वासपित्त होने से कर्षण (pull) उत्पन्न होता है जो जल को दारू (Xylem) से खींचती है । इस प्रकार वाष्पोत्सर्जन की क्रिया जड़ से पत्तियों तक जल के ऊपर की ओर पहुंचाने में सहायता है । अनुकूलतम अवस्था में पत्ती द्वारा उनके भार के समान जल के वाष्पउत्सर्जन में 1 घंटे से भी कम समय लगता है । एक वृक्ष अपनेे जीवन काल में औसतन अपने भार का 100 गुना जल वासित करता है ।