शाहजहाँ (1627-1657ई0) -2
शाहजहाँ ने दारा को शाह बुलन्द इकबाल की उपाधि से विभूशित किया था।
दारा ने स्वयं तथा काशी के कुछ संस्कृत के पंडितो की सहायता से वावन उपानिषदों का सिर्र-ए-अकबर नाम से फारसी में अनुवाद करवाया।
दाराशिकोह ने योग वशिष्ठ एवं भगवत गीता का फारसी में अनुवाद करवाया।
दारा शिकोह ने एक पुस्तक श्मज्म उल वहरीनश् की रचना की।
शाहजहाँ पहला मुगल शासक था जिसके जीवित रहते हुये भी उसके चारो पुत्रों के बीच उत्तराधिकार का युद्ध लड़ा गया था।
15 अप्रैल 1658 को उज्जैन के निकट धरमट नामक स्थान पर शाही सेना और औरंगजेब के बीच हुआ जिसमें शाही सेना पराजित हुआ।
शामूगढ़ का युद्व 28 मई 1658ई0 दाराशिकोह के नेतृतव में शाही सेना का औरंगजेब और मुराद की सम्मिलित सेना के बीच निर्णायक युद्ध हुआ जिसने दिल्ली के भाग्य का फैसला औरंगजेब के विजय के रूप में हुआ।
औंरंगजेब और शाहशुजा के बीच 1659 में खजुआ का युद्व हुआ। जिसमें शाहशुजा पराजित हो भारत से पलायन कर गया।
औंरंगजेब और दारा के बीच अन्तिम युद्ध अजमेर के निकट देवराई की घाटी में हुआ जिसमंे दारा अन्तिम रूप सें पराजित हुआ।
उत्तराधिकार युद्ध मंे सफलता के पश्चात् औरंगजेब ने शाहजहाँ को आगरे के किले के शाहबूर्ज में नजरबन्द कर दिया। वही पर 1666ई0 में एक कैदी के रूप में शाहजहाँ की मृत्यु हो गयी।
शाहजहाँ के शसन काल में दूसरा विद्रोह जूझार सिंह का था।
प्रथम विद्रोह अफगान सरदार खाने जहाँ लोदी ने किया।
1633 ई0 में शाहजहाँ ने अहमदनगर को मुगल साम्राज्य में मिला लिया।