राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा, 2005 के मुख्य बिंदु

NCERT का विचार था कि कोई भी पाठ्यक्रम एवं निश्चित नहीं होता है। समय की धारा के परिवर्तन के साथ पाठ्यक्रम में भी बदलाव किए जाने चाहिए। पाठ्यक्रम हमेशा विकासात्मक प्रक्रिया में रहता है। समाज के विकास की प्रक्रिया के अनुरूप ही राष्ट्रीय पाठ्यक्रम के विकास की प्रक्रिया भी होती है। इस धारणा को कार्य रूप में परिवर्तित करते हुए तत्कालीन एनसीईआरटी के अध्यक्ष में राष्ट्रीय पाठ्यक्रम संरचना, 2005 को प्रस्तुत किया, जिसमें राष्ट्रीय पाठ्यक्रम, 1988 एवं राष्ट्रीय पाठ्यक्रम संरचना, 2000 के विषयों को परिमार्जित क्रमबद्ध एवं संगठित रूप में प्रस्तुत किया। इसके साथ साथ इसमें नवीन विषयों को भी शामिल किया गया। राष्ट्रीय पाठ्यक्रम, 2005 में समाहित बिंदु हैं है

1 भाषाई शिक्षा का समावेश।    2 अभिभावकों की सहभागिता।    3 रुचिकर शिक्षा प्रणाली ।    4 सामाजिक भावनाओं का समावेश।    5 मानवीय मूल्यों का समावेश।     6 राष्ट्रीय एकता का समावेश ।  7 बिना बोझ के अधिगम प्रक्रिया का समावेश। 8 विद्यार्थी का स्वतंत्र विकास। 9 पूर्व कार्यक्रम का समावेश। 10 सामान्य पाठ शालाओं की व्यवस्था।  11 पूर्व कार्यक्रमों की असफलताओं पर विचार।  12 वित्तीय एवं मानवीय सोच पर विचार। 13 अध्यापक सशक्तिकरण का समावेश। 14 अनुदेशन का माध्यम। 15 कक्षा कक्ष प्रबंधन पर विचार। 16 धर्मनिरपेक्षता का समावेश।      यही सब राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा 2005 के मुख्य बिंदु थे।

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