सर जे0 जे0 स्कूल आॅफ आटर््स मुम्बई (1857 ई0)
यह कला महाविद्यालय एलफिस्टोन इन्स्टीट्यूट आॅफ आर्ट एण्ड इन्डस्ट्री में विलियम जैरी द्वारा 1857 ई0 में प्रारम्भ किया गया।
1878 ई0 में वर्तमान स्थान पर स्थानान्तरित कर इसका नाम जे0 जे0 स्कूल आॅफ आर्ट हो गया।
1890 ई0 में यह कला विद्यालय मुम्बई सरकार के अधीन हो गया।
जार्ज ग्रिफित्थ्स तथा पेस्टोनजी बोमानजी का इसके विकास में पूर्ण योगदान रहा।
प्रारम्भ में यहाँ लंदन से ही कला शिक्षक आये तथा लाॅकबुड कियलिंग तथा सिसिल वर्न प्रमुख थे।
1923 ई0 में द इंडिया रूम नामक गौरवशाली योजना का प्रारम्भ प्राचार्य कैप्टल ग्लेडस्टोन सोलोमन ने समकालीन कला को प्रदर्शित करने के लिये किया जो 1936 ई0 तक प्राचार्य रहे।
स्वतन्त्रता के पश्चात प्रथम भारतीय प्राचार्य वासुदेव अर्दुरकर बने।
राजस्थान स्कूल आॅफ आर्ट जयपुर (1857 ई0)
इण्डस्ट्रीय आर्ट सोसायटी के सहयोग से 1851 ई0 में अंग्रेजों ने भारत में (कलकत्ता, मद्रास, लाहौर एंव मुम्बई) जो कला विद्यालय स्थापित किये थे, उसी श्रंृखला में जयपुर के महाराजा सवाई रामसिंह द्वितीय (1835 ई0-1880 ई0) ने 1857 ई0 में मदरसा-ए-हुनरी नामक कला विद्यालय सिटी पैलेस के बादल महल में स्थापित किया।
इसके प्रथम प्राचार्य यूरोपीय विद्वान डाॅ0 सी0 एस0 वेलेन्टाइन नियुक्त हुए।
1866 ई0 में इसे वर्तमान भवन मंे स्थानांतरित कर दिया गया तथा जयपुर स्कूल आॅफ आर्ट एंव महाराजा स्कूल आॅफ आटर््स एण्ड क्राफ्ट्स के नाम से जाना गया।
यह राजस्थान का एक मात्र स्नात्कोत्तर ललित कला महाविद्यालय है।
इस कला महाविद्यालय को असित कुमार शैलेन्द्र डे, हिरण्यम चैधरी आदि ने प्राचार्य एंव उपप्राचार्य पद पर रहते हुए गौरवशाली बनाया।