कला दीर्घायें
राष्ट्रीय आधुनिक कला दीर्घा नई दिल्ली (1954 ई0)
जयपुर हाउस (नई दिल्ली) में 29 मार्च 1954 ई0 को राष्ट्रीय आधुनिक कला दीर्घा का उद्घाटन कर भारतीय कला के प्रसिद्ध विद्वान डाॅ0 हरमन गोएत्स को इसका अध्यक्ष बनाया गया।
1956 ई0 में गोएत्स महोदय ने इसका कार्यभार मुकुल चन्दडे को हस्तान्तरित कर दिया।
यह कला दीर्घा भारत में अपनी तरह की अकेली संस्था है, जिसका संचालन तथा प्रशासन भारत सरकार के पास है।
यहाँ पर 1950 ई0 से कला रूपांकारों की विकसित होती हुयी परम्परा का प्रतिनिधित्व करता हुआ संग्रह है।
राष्ट्रीय आधुनिक कला दीर्घा का मुख्य प्रयोजन भारत की आधुनिक तथा समकालीन कला का संरक्षण प्रोत्साहन तथा विकास करना है।
यहाँ बंगाल स्कूल राजारवि वर्मा तथा उनके अनुगामी कलाकारों अमृताशेरगिल तथा अन्य समकालीन कलाकारों की कृतियाँ है।
राष्ट्रीय आधुनिक कला दीर्घा ने एक शाखा मुम्बई मंे दिसम्बर 1995 ई0 में सर कावसाजी जहाँगीर हाल में प्रारम्भ की गयी।
नीलामी घर (Action House)
निजी कला दीघाओं के अतिरिक्त समकालीन भारतीय कला के विकास में एंव उनका बाजार बनाने में नीलामी घरों का योगदान भी महत्वपूर्ण रहा। (।नबजपवद भ्वनेम)
आक्शन शब्द लैटिन भाषा के ंनहमतम शब्द से हुयी, जिसका तात्पर्य है, बढ़ाना।
विश्व का प्राचीन नीलामी घर स्टाक होम आॅक्शन हाउस स्वीडन (1677 ई0) सोदबी‘स विश्व का दूसरा बड़ा नीलाम घर है। इसके अतिरिक्त एस्प्रें‘स, क्रिस्टीज, बोनहम‘स, बोबरिंग‘स, अटिनेट वर्डवाइड आदि है।
भारत में सेफ्रान, हार्ट तथा ओसियन‘स इमामी चिजेल आर्ट प्रा0 लि0 है। इन्टरनेट से भी नीलामी घरों का महत्व बढ़ा है।
कलाकारों को दीर्घाओं एवं नीलामी घरों से एक समान मंच मिलता है। जिनके माध्यम से वे स्वयं को समाज के बीच उपस्थित कर पाते हैं।