जम्मू कश्मीर राज्य एवं संविधान

जम्मू कश्मीर भारतीय संविधान के अनुच्छेद 1 में  की गयी परीभाषा  के अनुरूप भारतीय संघ का 15वा राज्य था । किंतु संविधान के वे सभी उपबंध जो पहली अनुसूची से सम्बंधित राज्यों पर लागू होते हैं वे  संविधान के अनुच्छेद 370 के तहत प्राप्त विशेष प्रतिस्थिति के कारण जम्मू कश्मीर राज्य पर लागू नही होते । यह भारतीय संघ का एक मात्र राज्य है जिसका अपना संविधान भी है। यह संविधान 26 जनवरी , 1957 से लागू है।

    जम्मू कश्मीर के भारत मे विलय की तत्कालीन परिस्थितियों के कारण भारत सरकार ने यह घोषणा की थी कि राज्य के लोग संविधान सभा के माध्यम से कार्य करते हुए यह अंतिम रूप से तय करेंगे कि राज्य का संविधान क्या होगा और भारतीय संघ की उसमे क्या अधिकारिता होगी।  राज्य के संविधान के अनुच्छेद 22 (7) के अधीन संसद द्वारा बनाई गई निवारक निरोध के विधान का  विस्तार जम्मू कश्मीर राज्य पर नही होगा।

1986 के एक अध्यादेश द्वारा भारतीय संविधान की धारा 249 का विस्तार जम्मू कश्मीर राज्य पर भी कर दिया गया है। इस अनुच्छेद के माध्यम से राज्य दो तिहाई बहुमत के संकल्प से पारित विधान के आधार पर राज्य के किसी भी विषय पर कानून बना सकती है। इसके अतिरिक्त अनुच्छेद 352 और 360 के प्रावधान राज्य का राज्यपाल राष्ट्रपति की परामर्श से राज्य की समस्त विधायी एवं कार्यकारी शक्तियों को अपने हाथ मे ले सकता है।भारतीय संविधान के भाग 4 में वर्णित नीति निदेशक सिद्धान्त जम्मू कश्मीर राज्य पर लागू नहीं होते हैं।

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