अल्तामीरा की गुफा (गीली सतह पर)
इस गुफा में लगभग 150 चित्र प्राप्त होते है, जो अल्तामीरा की गुफा में वाइसन (महिष) के चित्र प्राप्त होते है।
इस गुफा की कलात्मक छत को देखकर मारिया सांतुओला ने इसे ‘‘द रूफ आॅफ द ग्रेट’’ की संज्ञा दी।
ये गुफा चूना पत्थर से निर्मित है। इस गुफा की दीवारों से निर्मित अधिक छत पर की गई चित्रकारी के साक्ष्य विश्व के प्रागैतिहासिक कला के सबसे पुराने साक्ष्य माने जाते है।
अल्तामीरा की गुफा 300 गज में जंगली सुअर, बारहसिंहा, जंगली अश्व, हिरण एंव जंगली बकरा की आकृतियाँ भी मिली है।
इसमें जंगली भैंसा का चित्र अपनी सजीवता व गम्भीरता के लिए विख्यात है।
यहाँ के प्रारम्भिक चित्र काले व लाल रंग की सीमा रेखाओं से बनाये गये है।
अल्तामीरा की गुफा में प्रागैतिहासिक मानव द्वारा अंकित सर्वप्रथम चित्र प्राप्त हुए है, जो गीली दीवार पर हाथ की अंगुलियों द्वारा बनाई गई फीते के समान टेढ़ी-मेढ़ी रेखाओं में है।
इसे प्रागैतिहासिक कला का सिस्टाइन चैपल कहा जाता है।
नियो गुफा
पेरनीर/पेरानीज घाटी में स्थित नियो गुफा की जानकरी 1866 ई0 में हुई।
इस गुफा के अन्दर एक झील है, और यहाँ पर लाल-पीले संगमरमर से बना कक्ष है।
इस गुफा के सभी चित्र जिसमें महिष, अश्व, बकरी, हिरन प्रवाहपूर्ण शैली में काली वाह्य रेखा द्वारा बनाये गये है।
नियो गुफा में नोटूर सेलून नामक कक्ष पाया गया है।