औरंगजेब का जन्म 3 नवम्बर 1618 ई0 को उज्जैन के निकट दोहद नामक स्थान पर हुआ था।
औरंगजेब प्रथम मुगल बादशाह था जिसका राज्ययाभिषेक दो बार हुआ।
पहली बार 21 जुलाई 1658 में आगरा में तथा दूसरी बार 15 जून 1659 ई0 दिल्ली में हुआ। जब 1626 में शाहजहाँ ने अपने पिता के विरूद्ध विद्रोह किया तो उसे दपरा और औरंगजेब को जमानत के रूप में जहाँगीर के पास भेजना पड़ा था।
अब्वाब-भूमिकर व चुंगीकर के अतिरिक्त कर
मुहतसिब-लोक आचरण का निरीक्षक
औरंगजेब के समय में अहमो (असम) के साथ लम्बा संघर्ष चला। अहोमो पर विजय का श्रेय मीरजुमला को दिया जाता है।
औरंगजेब एक कुशल वीणावादक था।
औरंगजेब के समय में आर्थिक कारणों से मथुरा के जाटो ने गोकुल के नेतृत्व 1669 में विद्रोह किया। 1686 में जाटों ने राजाराम और रामचेरा ने किया। मनूची के अनुसार इस विद्रोह में जाटों ने सिकन्दा स्थित अकबर के मकबरे को लूटा और उसकी हड्डियाँ जला दी।
औरंगजेब ने सिक्खों के नौवे गुरु तेगबहादुर को 1675 में मृत्यु दण्ड दिया। गुरुगोविन्द सिंह का जन्म पटना में हुआ था। इन्होंने 1699 ई0 में खालसा पंथ की स्थापना किया। गुरुगोविन्द सिंह ने औरंगजेब को संबोधित कर फारसी भाषा में जफरनामा नामक पत्र लिखा था।
औरंगजेब का वजीर असदखाँ था जो 31 वर्षों तक (सबसे लम्बी अवधि तक) वजीर रहने वाला एकमात्र व्यक्ति था।
-शेष अगले भाग में