औरंगजेब (1658-1707ई0) -2

सद्र-उस-सुदूर-धार्मिक मंत्री। इसके कार्यालय को दीवान-ए-सआदत कहते थे। मुगल बादशाहों में अकबर और औरंगजेब ने अपने सद्रो को अपदस्थ कर दिया था।

      औरंगजेब ने झरोखा दर्शन एवं नौरोज मनाने पर रोक लगा दी थी।

      सिक्खों के नवें गुरू तेगबहादुर की हत्या औरंगजेब ने करवा दी थी।

      जय सिंह एव शिवाजी के बीच पुस्दर की सन्धि 1665 में हुयी थी।

      औरंगजेब ने 1679 मंें जजिया कर पुनः लागूू कर दिया था औरंगजेब ने मारवाड़ विजय के बाद यह कर लगाया था।

      औरंगजेब ने अपनी पत्नी के स्मृति में बीबी का मकबरा का निर्माण औरंगाबाद मे ंकरवाया था। इसे द्वितीय ताजमहल कहा जाता है।

      औरंगजेब ने 1686ई0 में बीजापुर-1687ई0 मंे गोलकुण्डा को मुगल साम्राज्य में सम्मिलित कर लिया था।

      मदन्ना एवं अकन्ना गोलकुंडा से सम्बन्धित थे ।

      औरंगजेब के समय भरतपुर राजवंश की नीव चूरामन ने डाला था।

      औरंगजेब के समय  मुगल प्रशासन में हिन्दू मनसवदारो की संख्या सबसे अधिक थी।

      औरंगजेब ने सिक्कों पर कलमा खुदवाना, फारसी त्यौहार नवरोज मनाना, गाना, बजाना, झरोखा दर्शन, तुलादान आदि पर प्रतिबन्ध लगा दिया।

      औरंगजेब ने 1669 में हिन्दू मन्दिरों को तोड़ने का आदेश दिया था।

      औरंगजेब के समय मुगल सूबों की संख्या 20 थी।

      औरंगजेब की मृत्यु 4 मार्च 1707ई0 को हुयी-इसे दौलताबाद में फकीर बुहरानुद्दीन की कब्र के अहाते मे ंदफना दिया गया।

      औरंगजेब का प्रमुख लक्ष्य भारत को दार-उल-हर्ब के स्थान पर दार-उल-इस्लाम का देश बनाना था।

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