मुगलशासन काल मंे मंत्री परिषद को विजारत कहा जाता था।
प्रमुख अधिकारीः-प्रशासन की दृष्टि से मुगल साम्राज्य का बटवारा सूबों में, सूबो को सरकार म,ें सरकार को परगनो में, परगनो को महाल में किया जाता था।
1. सूबेदार -प्रान्तों का प्रधान अधिकारी।
2. दीवान-प्रान्तीय राजस्व का प्रधान
3. बख्शी-जिले का प्रधान सैन्य अधिकारी।
4. आमिल या अमलगुजार-जिले का प्रमुख राजस्व अधिकारी।
5. कोतवाल-नगर का सुरक्षा अधिकारी
6. शिकदार-परगने का प्रमुख अधिकारी
7. आमिल का प्रमुख कार्य था ग्राम के किसानों से प्रत्यक्ष सम्बन्ध बनाना एवं लगान निर्धारित करना।
सूचना एवं गुप्तचर विभाग का प्रमुख अधिकारी दरोगा ए डाक चैकी होता था।
सम्राट के बाद शासन कार्य को संचालित करने वाला सबसे महत्वपूर्ण अधिकारी वकील था।
काजीउल कुजात न्याय विभाग का प्रधान था।
सम्राट के घरेलू आवश्यकताओं का प्रबन्धक मीर-ए-सामा कहलाता था। यह कारखाने का भी प्रमुख था।
भूमिकर निर्धारकण के आधार पर मुगल साम्राज्य की समस्त भूमि को 3 वर्गो में विभाजित किया गया था।
खालसा भूमि-प्रत्यक्ष रूप से बादशाह के नियत्रण मेे।
जागीर भूमि-वेतन के बदले अधिकारियों को दी जाने वाली भूमि।
सरयूगल या मदद-ए-मास-अनुदान मे विद्वानों को दी गई लगान मुक्त भूमि इसे मिल्क भी कहा जाता था।
भूमि को उपज के आधार पर चार प्रकारों मे विभाजित किया गया था।
पोलज- प्रति वर्ष बोई जाने वाली भूमि।
परती-एक या दो वर्ष के अन्तराल पर बोई जाने वाली भूमि।
चाचर- ऐसी भूमि जिस पर तीन या चार वर्षो तक खेती नही होती थी।
बंजर- ऐसी भूमि जिस पर पाँच वर्षो से खेती नही की गयी हो।
मुगलकाल में रूपये की सर्वाधिक ढलाई औरंगजेब के समय हुयी।