लोक अदालत

  1. भारत में लोक अदालतों की स्थापना शीघ्र न्याय तथा अल्पव्यय न्याय के उद्देश्य से की गई है।
  2. शीघ्र न्याय की अवधारणा पर आधारित इस व्यवस्था में सौहार्दता तथा समझौते को न्याय का उद्देश्य बनाया जाता है।
  3.  6अक्टूबर, 1985 को उच्चतम न्यायालय के तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश पी एन भगवती की अध्यक्षता में प्रथम लोक अदालत का आयोजन किया गया था ।
  4. न्यायिक सेवा प्राधिकार अधिनियम की सहायता से लोक अदालत की संकल्पना का सुदृढ़ करण किया गया है।
  5. अधिनियम के अनुसार , केंद्र या राज्य सरकार या जिला प्रशासन समय समय पर और निर्धारित स्थानों पर लोक अदालत का आयोजन कर सकती है
  6. लोक अदालत के निर्णय को दीवानी अदालतों द्वारा निर्णय के समरूप माना जाता है
  7. सम्बंधित वादी प्रतिवादी लोक अदालत के निर्णय मानने के लिए बाध्य होता है।
  8. अधिनियम के अनुसार , न्यायिक पदाधिकारी अथवा सरकार द्वारा निर्धारित योग्यता रखने वाले व्यक्ति लोक अदालत की अध्यक्षता करते हैं।
  9. वर्ष 2002 में संसद ने कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम 1987 में इस उद्देश्य से संसोधन किया ताकि मुक़दमें बाजी से पहले मतभेदों को सुलझाने की व्यवस्था की जाये।लोक अदालत को अंतिम रूप से मामलो का निपटारा करने एवं निर्णय देने का अधिकार प्रदान किया गया है। इनके द्वारा दिये गए निर्णय को न्यायालयों में चुनौती नही दी जा सकती।
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