अवध पश्चिम में कन्नौज से लेकर पूर्व में कर्मनासा नदी तक फैला था ।यह राज्य मराठा एवं अंग्रेजोंं के बीच बफर राज्य के रूप में था ।अवध के स्वतंत्र राज्य की स्थापना 1722 ई. में स्थापित सआदत खा बुरहानुलमुल्क ने की थी ।इसने फैजाबाद को अपनी राजधानी बनाया ।
सआदत खा ने नादिरशाह को 20 करोड़ का खजाना प्राप्त करने के लिए दिल्ली पर आक्रमण करने की सलाह दी, किन्तु जब नादिरशाह ने दिल्ली पर अधिकार कर लिया और सआदत खा से 20 करोड़ रुपए की मांग की तो सआदत खा ने विष खाकर 1739 ई. मेेें आत्महत्या कर ली ।
सआदत खा के बाद सफदरजंग (1739-1754 ई. ) अवध का नवाब बना, जो उसका दामाद व भतीजा था
मुगल बादशाह मुहम्मद शाह ने सफदर जंग को अवध का नवाब तथा अपना वजीर नियुक्त किया । 1754 ई. में सफदरजंग की मृत्यु हो गई ।
सफदरजंग की मृत्यु के बाद उसका पुत्र शुजाउद्दौला (1754 - 1775 ई. ) अवध का नवाब बना ।
1759 ई. में मुगल बादशाह शाहआलम द्वितीय को अपनी सुरक्षा के कारण दिल्ली छोड़ना पड़ा तब शुजाउद्दौला ने उसे लखनऊ मेेें शरण दी ।पानीपत के तृतीय युुुुद्ध मेेें शुजाउद्दौला ने मराठों के विरुद्ध अहमदशाह अब्दाली का साथ दिया । बक्सर के युद्ध (1764 ई. ) में शुजाउद्दौला ने अंग्रेजोोंों के विरुद्ध बंगाल अपदस्थ नवाब मीर कासिम का साथ दिया । 1774 ई. में शुजाउद्दौला ने मीरनपुर कटरा के युद्ध मेेें रूहेला सरदार हाफिज अहमद खा को परास्त कर रूहेलखण्ड को अवध मेेें सम्मिलित कर लिया ।