सूत्र कालीन सभ्यता की जानकारी सूत्र साहित्य से मिलती है ।वैदिक साहित्य को संक्षिप्त करने के लिए सूत्र साहित्य की रचना की गई ।
वैदिक साहित्य का विभाजन 6 अंगों में किया गया, इन्हें वेदांग कहते हैं ।अष्टाध्यायी वेदोत्तर संस्कृत साहित्य की सबसे प्रारंभिक रचना है।
अष्टाध्यायी की रचना महर्षि पाणिनी ने की थी ।
पास्क ने निरूक्त नामक ग्रन्थ की रचना की ।निरूक्त क्लासिकल संस्कृत गद्य का सर्वप्राचीन ग्रन्थ है।
सूत्र काल में वर्ण जातियों में परिवर्तित हो गये ।जातियों का आधार कर्म न होकर जन्म हो गया ।
ब्राह्मण, क्षत्रीय, वैश्य को एक साथ ' द्विज' कहा जाता था तथा द्विज को शूद्रों से अलग माना जाता था ।
इस काल में अस्पृश्यता का उदय हुआ ।
चान्डाल अस्पृश्य माने जाने लगे, जो नगर के बाहर निवास करते थे ।
गृह सूत्र में 16 प्रकार के संस्कार तथा 8 प्रकार के विवाहों का उल्लेख है ।
स्त्रियों की दशा उत्तर वैदिक काल से खराब हो गई ।
सूत्र काल में सिक्कों का प्रचलन प्रारंभ हो गया ।
सबसे प्राचीन सिक्कों को आहत सिक्के कहा जाता था ।ये मुख्यतः चांदी के बने होते थे ।इन पर सुर्य, चन्द्र, पीपल आदि के निशान बने होते थे ।