पाश्चात्य चिंतन तथा शिक्षा

आधुनिक शिक्षा प्रणाली के प्रचलन से आधुनिक पाश्चात्य विचारो को अपनाने में मदद मिली,जिससे भारतीय राजनीतिक चिंतन को एक नई दिशा मिली।जब ट्रेवेलियन, मैकाले ,तथा बैंटिक ने देश मे अंग्रेजी शिक्षा का श्री गणेश किया तो यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय था।पाश्चात्य शिक्षा का प्रसार यद्यपि प्रशासनिक अवश्यकतावो के लिए किया गया था परंतु इससे नवयुवकों के लिए पाश्चात्य उदारवादी विचारधारा के द्वार खुल गए। बेंथम, शीले, मिल्टन, मिल, पेन, रूसो, जैसे प्रसिद्ध यूरोपीय लेखकों के अतिवादी और पाश्चात्य विचारो ने भारतीय बुद्धिजीवियों में स्वतंत्र राष्ट्रीयता तथा स्वशासन की भावनाएं जगा दी और उन्हें अंग्रेजी साम्राज्य का विरोधाभास खलने लगा।इसके साथ ही अंग्रेजी भाषा ने सम्पूर्ण राष्ट्र के विभिन्न प्रान्तों एवं स्थानों के लोगो के लिए संपर्क भाषा का कार्य किया।

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