समय -समय पर उपनिवेशी शासको द्वारा भारतीय प्रेस पर विभिन्न प्रतिबंधों के बावजूद 19 वी शताब्दी के पूर्वार्द्ध में भारतीय समाचार पत्रों एवं साहित्य की आश्चर्य जनक प्रगति हुई। 1877 में प्रकाशित होने वाले विभिन्न भासाई एवं हिंदी समाचार पत्रों की संख्या लगभग 169 थी।तथा इनकी प्रसार संख्या लगभग 1 लाख तक पहुँच गयी थी।भारतीय प्रेस,जहाँ एक ओर उपनिवेशी नीतियों की आलोचना करता था वही दूसरी ओर देशवासियों से आपसी एकता स्थापित करने का आह्वाहन करता था।प्रेस ने आधुनिक विचारों एवं व्यवस्था यथा-स्वशासन, लोकतंत्र, दीवानी अधिकार एवं औद्योगिकरण इत्यादि के प्रचार प्रसार में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।समाचार पत्रों ,जर्नल्स , पम्पफलेट्स, तथा राष्ट्रवादी साहित्य ने देश के विभिन्न भागों में स्थित राष्ट्रवादी नेताओं के मध्य विचारों के आदान प्रदान में भी सहायता पहुचाई। इस प्रकार भारतीय समाचार पत्र भारतीय राष्ट्रवाद के दर्पण बन गए ।19 वी एवं 20 वी शताब्दी में विभिन्न प्रकार के साहित्य की रचना हुई,उससे भी राष्ट्रीय जागरण में सहायता मिली।विभिन्न कविताओं, निबंधों, कथाओं, उपन्यासों, एवं गीतों ने लोगों में देश भक्ति तथा राष्ट्र प्रेम की भावना जागृत की।साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से भारतीयों में समानता एकता, भाईचारा तथा राष्ट्रीयता की भावना को बढ़ावा दिया।