महाराष्ट्र राज्य मुंबई में विश्व आर्थिक मंच के सहयोग से बनी चौथी औद्योगिक क्रांति के केंद्र का शुभारंभ 11 अक्टूबर 2018 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा राजधानी नई दिल्ली में किया गया ।
पहली औद्योगिक क्रांति
पहली औद्योगिक क्रांति यूरोप और अमेरिका में 18वीं से 19 वीं शताब्दी के मध्य हुई । यह एक ऐसी अवधि थी जब अधिकांश कृषक व ग्रामीण समाज औद्योगिक व नगरी बन गए भाप इंजन के विकास के साथ-साथ लौह इस्पात तथा कपड़ा उद्योगों ने औद्योगिक क्रांति में केंद्रीय भूमिका निभाई ।
दूसरी औद्योगिक क्रांति
दूसरी औद्योगिक क्रांति 1870 से 1914 के बीच प्रथम विश्व युद्ध से ठीक पहले हुई । यह पूर्व- विद्यमान उद्योगों तथा इस्पात, तेल व बिजली जैसे नए उत्पादों के विस्तार की अवधि थी । इस अवधि में बड़े पैमाने पर उत्पादन के लिए विद्युत शक्ति का उपयोग किया गया । इस अवधि के दौरान प्रमुख तकनीकी प्रगति में टेलीफोन, लाइट, बल्ब, फोनोग्राफ और आंतरिक दहन इंजन आदि शामिल हैं ।
तीसरी औद्योगिक क्रांति
तीसरी औद्योगिक क्रांति अथवा डिजिटल क्रांति यांत्रिक उपकरणों से आज उपलब्ध डिजिटल प्रौद्योगिकी तक की प्रगति को संदर्भित करता है । 1980 के दशक के दौरान शुरू हुई यह क्रांति वर्तमान तक जारी है इस दौरान हुई तकनीकी प्रगति में कंप्यूटर, इंटरनेट, तथा सूचना और संचार प्रौद्योगिकीयां शामिल हैं ।
चौथी औद्योगिक क्रांति
चौथी औद्योगिक क्रांति का संबंध रोबोटिक्स, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, नैनो तकनीकी, क्वांटम कंप्यूटिंग, जैव प्रौद्योगिकी, इंटरनेट आफ थिंग्स व थ्री डी प्रिंटिंग सहित विभिन्न क्षेत्रों में उभरती हुई प्रौद्योगिकी सफलता से है ।
विनिर्माण तकनीकों में ऑटोमेशन तथा डेटा एक्सचेंज की वर्तमान औद्योगिक प्रवृति के चलते चौथी औद्योगिक क्रांति को इंडस्ट्री 4.0 नाम दिया गया है । इसमें साइबर- भौतिक प्रणालियां, क्लाउड कंप्यूटिंग तथा संज्ञानात्मक कंप्यूटिंग भी शामिल हैं ।