हड़प्पा सभ्यता या सिंधु घाटी सभ्यता को इस नाम से इसलिए जाना जाता है क्योंकि इसके प्रथम अवशेष हड़प्पा नामक स्थल से प्राप्त हुए थे तथा इसके आरंभिक स्थलों में से अधिकांश सिंधु नदी के किनारे अवस्थित थे।
गार्डन चाइल्ड ने सिंधु सभ्यता को भारतीय उपमहाद्वीप में प्रथम नगरीय क्रांति या फर्स्ट अर्बन सिविलाइजेशन कहा है। सर्वप्रथम चार्ल्स मेसन ने 1826 ईसवी में हड़प्पा नामक स्थल पर एक प्राचीन सभ्यता के अवशेष मिलने के प्रमाण की पुष्टि की थी। भारत में प्रागैतिहासिक स्थलों को खोजने का कार्य भारतीय पुरातत्व एवं सर्वेक्षण विभाग करता है
भारतीय पुरातत्व विभाग के जन्मदाता एलेग्जेंडर कनिंघम को माना जाता है। भारतीय पुरातत्व विभाग की स्थापना का श्रेय वायसराय लार्ड कर्जन को प्राप्त होता है। 1921 ईस्वी में भारतीय पुरातत्व विभाग के महानिदेशक जॉन मार्शल थे तब रायबहादुर दयाराम साहनी ने 1921 ईस्वी में हड़प्पा की तथा राखल दास बनर्जी ने 1922 ईस्वी में मोहनजोदड़ो की खुदाई कराई थी।
संस्कृति/सभ्यता
पुरातत्वविद संस्कृति शब्द का प्रयोग पुुरावस्तुओं के ऐसे समूह के लिए करते हैं जो एक विशिष्ट शैली के होते हैं। सामान्यतया एक साथ, एक विशेष भौगोलिक क्षेत्र तथा कालखंड से संबंध स्थलों पर पाए जाते हैं।
एक विस्तृत भू क्षेत्र पर जब संस्कृतियों में समानता पाई जाती है तो उसे सभ्यता कहते हैं ।जैसे सिंधु सभ्यता।
हड़प्पा सभ्यता: इस सभ्यता का सबसे उपयुक्त नाम हड़प्पा सभ्यता है क्योंकि सबसे पहले हड़प्पा स्थल की खोज हुई थी।
सिंधु सभ्यता: हड़प्पा सभ्यता के प्रारंभिक सिंधु नदी के आसपास अधिक केंद्रित थे। अतः इसे सिंधु सभ्यता कहा गया परंतु बाद में अन्य क्षेत्रों में भी स्थलों की खोज होने से अब इसका सर्वाधिक उपयुक्त नाम यह नहीं रह गया।
सिंधु-सरस्वती सभ्यता: हड़प्पा का मुख्य क्षेत्र सिंधु घाटी नहीं बल्कि सरस्वती तथा उसकी सहायक नदियों का क्षेत्र था जो सिंधु और गंगा के बीच स्थित था इसीलिए कुछ विद्वान सिंधु सरस्वती सभ्यता भी कहते हैं।
कांस्य युगीन सभ्यता: सिंधु वासियों ने प्रथम बार तांबे में टिन मिलाकर केे कांसा का आविष्कार किया। अतः इसे कांस्य युगीन सभ्यता कहा जाता है।
प्रथम नगरीय क्रांति: सिंधु सभ्यता को प्रथम नगरीय क्रांति भी कहा जाता है, क्योंकि भारत में प्रथम बार नगरों का उदय इसी सभ्यता के समय हुआ।
काल-निर्धारण: कार्बन डेटिंग जैसी नवीन विश्लेषण पद्धति के द्वारा हड़प्पा सभ्यता की तिथि 2500 ई.पू. से 1750 ई.पू. माना गया है। जो सर्वाधिक मान्य है। रेडियोकार्बन तकनीक के अनुसार सिंधु सभ्यता की तिथि 2350 ई.पू. से 1750 ई.पू. मानी गयी है।