मुख्यमंत्री की शक्तियां एवं कार्य

मुख्यमंत्री की सलाह पर ही राज्यपाल अन्य मन्त्रियो की नियुक्ति करता है। उच्चतम न्यायालय ने एफ गौस मोहिद्दीन बनाम द गवर्नमेंट ऑफ इंडिया AIR 2002 मद्रास SC 470 मामले में स्पष्ट किया है कि यह  मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार है कि वह मंत्रिमंडल निर्माण में ऐसे मंत्रियों को चुने जिसे वह उपयुक्त समझता हो। मुख्यमंत्री विभिन्न मंत्रियों के मन्त्रालयो का आवंटन करता है। वह मंत्रिपरिषद की बैठक की अध्यक्षता करता है । मुख्यमंत्री किसी भी मंत्री को त्यागपत्र देने के लिए कह सकते हैं अथवा किसी मंत्री को पदच्युत करने हेतु राज्यपाल को परामर्श दे सकते हैं। मुख्यमंत्री अपने पद से त्यागपत्र देकर किसी भी समय मंत्रिपरिषद को भंग कर सकता है। इसके अतिरिक्त अनु- 167 के उपबन्धों के अनुरूप मुख्यमंत्री, राज्यपाल और मंत्रिपरिषद के मध्य संवाद का माध्यम होता है। इस अनुच्छेद के अनुसार मुख्यमंत्री, राज्यपाल को मंत्रिपरिषद के सभी निर्णयों से अवगत कराता है। साथ ही , किसी विषय को जिसपर किसी मंत्री ने विनिश्चय कर दिया है। किंतु मंत्रिपरिषद ने विचार नही किया है, राज्यपाल द्वारा अपेक्षा किये जाने पर मुख्यमंत्री मंत्रिपरिषद के समक्ष उस विषय को विचार हेतु रखता है।

91वां संविधान संशोधन अधिनियम 2003 के अनुसार किसी राज्य की मंत्रीपरिषद में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की कुल संख्या के 15 % से अधिक नही होगी। परन्तु किसी राज्य में मुख्यमंत्री सहित मंत्रियों की संख्या 12 से कम भी नहीं होगी।

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