मराठा-3

चैथ एवं सरदेश मुखी नामक कर शिवाजी द्वारा लिया जाता था। चैथ (उपज की 1/4 भाग) का बँटवारा-

      (1)   मोकास      - आय का 66ः मराठा सरदारों के घुड़सवार

      (2)   बबती  - आय का 25ः राजा के लिए

      (3)   सहोत्रा - आय का 6ः पंत सचिव के लिए

      (4)   नाडगुण्डा     - आय का 3ः भाग राजा की इच्छा पर निर्भर था।

      शिवाजी का उत्तराधिकारी उसका पुत्र शम्भाजी था।

      शम्भाजी ने प्रकाण्ड विद्वान कवि कलश को अपना मंत्री नियुक्ति किया था।

      1689ई0 में मुगल सेनापति मुर्करब खाँ ने संगमेश्वर में छिपे हुये शम्भा जी एंव कवि कलश को गिरफ्तार कर लिया और  शम्भाजी की हत्या कर दी। इसके समय में अष्टप्रधान का विघटन हो गया।

      शम्भाजी के मृत्योपरान्त 1689ई0 में शिवाजी के छोटे पुत्र राजाराम का छत्रपति के रूप में राज्याभिषेक किया गया।

      राजाराम ने अपनी दूसरी राजधानी सतारा को बनाया। यह 8 वर्षों तक जिंजी के किले में कैद था।

      1700ई0 में राजाराम की मृत्यु के बाद उसकी पत्नी ताराबाई ने अपने चार वर्षीय पुत्र शिवाजी द्वितीय का राज्यभिषेक करवाकर मराठा साम्राज्य की वास्तविक संरक्षिका बन गयी।

      शम्भाजी के पुत्र शाहू और ताराबाई के बीच 1707 ई0 में खेड़ा का युद्व हुआ जिसमें शाहू विजयी हुआ।

      शाहू ने 1708ई0 में सतारा में अपना राज्याभिषेक करवाया।

-शेष अगले भाग में

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