मराठा-4

शाहू के नेतृत्व में नवीन मराठा साम्राज्य के प्रवर्तक पेशवा लोग थे जो शाहू के पैतृक प्रधानमंत्री थे।

      1713ई0 में शाहू ने बालाजी विश्वनाथ को पेशवा बनाया। बालाजी विश्वनाथ को मराठा सम्राज्य का द्वितीय संस्थापक माना जाता है। इसने 1719 में मुगलबादशाह की ओर से सैय्य्ाद हुसैन अली द्वारा मराठों से सन्धि की गयी। रिचर्ड टेम्पल ने इस सन्धि को मराठों का मैग्नाकार्टा कहा।

      कानोजी आंगे्र के नेतृत्व में मराठा नौ सेना अपने चरमोत्कर्ष पर पहुँच गये।

      1720ई0 मंे पेशवा बालाजी विश्वनाथ की मृत्यु हो गयी।

      बालाजी विश्वनाथ के मृत्यु के बाद उसका योग्य पुत्र बाजीराव प्रथम मराठा साम्राज्य का अगला पेशवा बना।

      पालखेड़ा का युद्व 1728ई0 में बाजीराव प्रथम और हैदराबाद के निजामुलमुल्क के बीच हुआ जिसमें निजाम पराजित हुआ। पराजित निजाम ने मराठों के साथ मुंगी शिवगाँव की संधि की।

      दिल्ली पर आक्रमण करने वाला प्रथम पेशवा बाजीराव प्रथम था।

      1740ई0 में बाजीराव प्रथम की मृत्यु हो गयी इसके बाद बालाजी बाजीराव पेशवा बने।

      1750ई0 में संगोला की सन्धि के पश्चात् मराठा संगठन का वास्तविक नेता पेशवा बन गया।

      14 जनवरी 1761ई0 में पानीपत के मैदान में अफगान शासक अहमदशाह अब्दाली और विश्वासराव के नेतृत्व में मराठों के बीच पानीपत का तृतीय युद्व हुआ इस युद्ध में मराठांे की हार हुयी। पानीपत के युद्ध में मराठा तोपखाने का नेतृत्व इब्राहिम खाँ गर्दी ने किया था।

-शेष अगले भाग में

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