वैदिक साहित्य

वैदिक साहित्य के अन्तर्गत चारों वेद, ब्राह्मण ग्रन्थ अरण्यक व उपनिषद आते हैं ।

1- ॠग्वेद --- ईश्वर की महिमा  ( देवताओ की स्तुति )   2- यजुर्वेद --- कर्मकांड  ( बलिदान  विधि )                 3- सामवेद --- संगीत का विस्तृत उल्लेख                   4- अथर्ववेद ---  औषधियों सेे संबंधित 

वेदों का संकलन महर्षि कृष्ण द्वैपायन ने किया था ।

ॠग्वेद, यजुर्वेद को सम्मिलित रूप में वेदत्रायी कहा जाता है ।

शतपथ ब्राह्मण यजुर्वेद का ब्राह्मण है । प्राचीन इतिहास के साधन के रूप में वैदिक साहित्य में ॠग्वेद के बाद शतपथ ब्राह्मण का स्थान है । कर्मकांडों के अतिरिक्त इसमें सामाजिक विषयों का वर्णन है । पुरुष सेध का उल्लेख ब्राह्मण में ही हुआ है ।

अथर्ववेद को वेदत्रायी में सम्मिलित नहीं करते हैं, क्योंकि इसमें लौकिक विषयों का वर्णन है ।

ॠग्वेद आर्यों का सबसे प्राचीन ग्रन्थ है । इसमें देवताओ की स्तुति करने वाले गीत हैं ।ॠग्वेद में  10  मण्डल,  1028  सुक्त,  10580  मंत्र  हैं ।

ॠग्वेद के मंत्रों का उच्चारण करने वाले पुरोहित को ' होता' कहा जाता था ।

ॠग्वेद में  2-7 तक के मण्डल सबसे पुराने माने जाते हैं तथा  10 वा मण्डल सबसे बाद का है ।

ॠग्वेद के  10 वें मण्डल में पुरुष सूक्त है ।इसमें चारों वर्ण ब्राह्मण क्षत्रीय, वैश्य व शूद्र की उत्पति का उल्लेख है ।

ॠग्वेद का  9  वा मण्डल सोम को समर्पित है ।

सामवेद में  15419 मंत्र  हैं ।जिसमें  75  नये हैं, शेष ॠग्वेद से लिये गये हैं ।

साम का अर्थ गायन होता है।

संगीत के सात स्वरों ' सा रे ... गा ... मा...पा...' का उल्लेख सामवेद में मिलता है ।

सामवेद के मंत्रों को गाने वाले पुरोहित को उदगाता कहा जाता था ।यजुर्वेद कर्मकाण्डीय वेद है ।

यजुर्वेद  40  अध्याय में विभाजित है।इसमें कुल  1990  मंत्र  हैं ।यजुर्वेद के कर्मकांड को सम्पन्न करने वाले पुरोहित को अध्वर्यु कहा जाता था ।

यजुर्वेद की दो शाखाए हैं - शुक्ल यजुर्वेद तथा कृष्ण यजुर्वेद ।

अथर्ववेद अथर्वा ॠषि के नाम से बना है ।

अथर्ववेद में  20  अध्याय  731  सूक्त तथा 6000 मंत्र है ।

अथर्ववेद में जादू टोना, वशीकरण, भूत प्रेत तथा विभिन्न प्रकार की औषधियों का वर्णन है।अथर्ववेद को ब्रह्मवेद या श्रेष्ठवेद  भी कहा जाता है ।

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