कान नाक जीभ

कान - कान श्रुति संवेदनाओं को रिसीव करने वाला एक संवेदी अंग है जिसके लिए ध्वनि तरंगों को मिटाने से रोकने के लिए कान के 3 भाग होते हैं।

वाह्य कर्ण

मध्य क्रम

अन्त: कर्ण

कान सुनने के अलावा और शरीर का संतुलन बनाए रखने में मदद करता है यह कान की मैल तथा वहां कि बनीमोम पदार्थ होते हैं। कान का पर्दा कान की वाइफ का ऐड के अंतिम छोर पर कान में छ: हड्डियां होती हैं।

Static शरीर की सबसे छोटी हड्डी है जो कान के मध्य कर्ण में पाई जाती है अंतः करण जिसमें ऑर्गन ऑफ क्वार्टि में होता है।

नाक - मानव में नाक बंद संवेदना ओं को जानने के लिए एक संवेदी अंग है जिसके लिए नाक के अंदर एक विशेष प्रकार की न्यूरान होते हैं जो गंध संवेदना ओं को रिसीव करके अपनी सूचना को ब्रेन तक पहुंचाते हैं मानव में गंध का ज्ञान अन्य प्राणियों की अपेक्षा कम होता है।

जीभ - जीव टेस्ट का ज्ञान कराने वाला एक संवेदी अंग है जिसके लिए जीभ की सतह पर लगभग 3000 इस संख्या में स्वाद कणिकाएं पाई जाती हैं। यह चार प्रकार की होती हैं इससे चार प्रकार का स्वाद होता है

नमकीन,मीठा,खट्टा ,कड़वा।

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