राज्यपाल और मंत्रिपरिषद

  • जिन बातों में इस संविधान द्वारा या इसके अधीन राज्यपाल से यह अपेक्षित है कि वह अपने कृत्यों या उनमे से किसी को अपने विवेकानुसार करे, उन बातों को छोड़कर राज्यपाल को अपने कृत्यों का प्रयोग करने में सहायता एयर सलाह देने के लिये एक मंत्रिपरिषद होगी जिसका प्रधान, मुख्यमंत्री होगा।
  • यदि कोई प्रश्न उठता है कि कोई विषय ऐसा है या नही जिसके सम्बन्ध में इस संविधान द्वारा या इसके अधीन राज्यपाल से यह अपेक्षित है कि वह अपने विवेकानुसार कार्य करे तो राज्यपाल का अपने विवेकानुसार किया गया विनिश्चय अंतिम होगा और राज्यपाल द्वारा की गई किसी बात की इस आधार पर प्रश्नगत नही की जायेगी की उसे अपने विवेकानुसार कार्य करना  चाहिए था या नही।
  • इस प्रश्न की किसी न्यायालय में जांच नही की जाएगी कि क्या मंत्रियों ने राज्यपाल को कोई सलाह दी, और यदि दी तो क्या दी।

परन्तु उच्चतम न्यायालय ने पुलिस इस्टैब्लिशमेंट बनाम मध्यप्रदेश राज्य AIR 2005 SC 325 मामले में निर्णय दिया है कि अनु 163 (1) के तहत राज्यपाल बिना मन्त्रिमण्डल के परामर्श के किसी मंत्री के भी विरुद्ध भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम तथा भारतीय दंड संहिता के अंतर्गत किए गए अपराधों के लिए अभियोजन करने की स्वीकृति दे सकता है। अनु 163 (3) के अनुसार इस प्रश्न की किसी न्यायालय में जांच नही की जाएगी कि क्या मंत्रियों ने राज्यपाल को कोई सलाह दी और दी तो क्या दी है। इस प्रकार कार्यपालिका एवं न्यायपालिका के मध्य शक्ति पृथक्कीकरण सिद्धान्त को स्थापित किया गया है। अनु 164(2) के अनुसार मंत्रिपरिषद राज्य की विधान सभा के प्रति उत्तर दायीं होती है।

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