गुप्त काल में सांस्कृतिक विकास

प्रशासनिक पद्धति -

गुप्त राजाओं ने प्रांतीय स्थानीय शासन की पद्धति चलाई राज्य कई भुक्तियों अर्थात  और प्रांतों में विभाजित था ।और हर भुक्ति का प्रभारी उपयुक्त होता था भूक्तियों कई विषयों में विभाजित थी जिनका प्रभारी विषय पति होता था प्रत्येक विषय को विथियों में बांटा गया था विथि से छोटी इकाई पेठ थी। जो अनेक ग्रामों का समूह था सबसे छोटी प्रशासनिक इकाई ग्राम थी जिसका प्रधान मुखिया या बाहर था समानता भूमि पर सम्राट का स्वामित्व माना जाता था वह उत्पादन की एक बटे 6 भाग का अधिकारी था वेतन की अदायगी नगद में ना होकर सामान्यतया भूमि अनुदान के रूप में की जाती थी केंद्र के मुख्य विभाग  सैन्त था संधि विग्राहक सेना का मुख्य अधिकारी माना जाता था गुप्त वंशी राजाओं में बड़ी संख्या में सोने के सिक्के जारी की जिन्हें दिनार के नाम से जाना जाता था।

सामाजिक जीवन - जाति का उपजातियों में विभक्त थी स्त्री की दशा पहले से निम्न हो गई थी। इसी काल में सती प्रथा की प्रथम घटना का उल्लेख मिलता था इसका साक्ष्य भानु गुप्त के एरण अभिलेख में मिलता था बाल विवाह एवं बहु विवाह की प्रथा व्यापक हो गई देवदासी प्रथा की भी साक्ष्य प्राप्त हुए थे सूत्रों की दशा में थोड़ा सुधार हुआ था परंतु छुआछूत की प्रथा ने जड़े जमानी शुरू कर दी थी।

Posted on by