वित्तीय आपातकाल

अनु 360 यह उपबन्धित करता है कि यदि राष्ट्रपति को यह समाधान हो जाये कि ऐसी स्थिति उत्तपन्न हो गयी है। जिससे भारत या उसके किसी राज्यक्षेत्र के किसी भाग का वित्तीय स्थायित्व या प्रत्यय संकट में है तो वह उदघोषणा संसद के दोनों सदनों के समक्ष रखी जायेगी।ऐसी उदघोषणा संसद के दोनों सदनों के समक्ष रखी जायेगी । ऐसी उदघोषणा को दोनों सदनों द्वारा 2 माह में पारित किया जाना अनिवार्य है अन्यथा ऐसी उदघोषणा 2 माह पश्चात प्रवर्तन में नही रहेगी । परन्तु यदि इस 2 माह की अवधि में लोकसभा का विघटन हो जाता है और संकल्प राज्यसभा द्वारा अनुमोदित हो जाता है, किन्तु लोकसभा द्वारा नही होता है, तो उदघोषणा उस तारीख से , जब नई लोकसभा बैठती है, 30 दिन की समाप्ति पर प्रवर्तन में नही रहेगी जब तक कि इस अवधि के भीतर उदघोषणा के अनुमोदन का संकल्प लोकसभा द्वारा पारित नही हो जाता है।

उक्त अवधि में , जिसमे ऐसी उदघोषणा प्रवर्तन में है, संघ की कार्यपालिका शक्ति किसी राज्य को वित्तीय औचित्य सम्बन्धी ऐसी सिद्धांतो का पालन करने के लिए निदेश देने तक , जैसा कि निदेशों में उल्ललिखित हो ।

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