अग्नेय चट्टानें
• इन चट्टानों की उत्पत्ति लावा या मैग्मा के ठंडा होने से हुई है जिससे ये चट्टानें रवेदार होती हैं ।
• अंतर्वेदी आग्नेय चट्टानों के ठंडा होने व जमाने में अधिक समय लगने से इनमें अशुद्धियों का समावेश हो जाता है । जिससे इनके रवे बड़े होते हैं। वहीं, बहिर्भेदी आग्नेय चट्टानों शीतलीकरण वह ठोस होने में अपेक्षाकृत कम समय लगने के कारण निर्मित चट्टान के रवे बारीक होते हैं ।
• इन चट्टानों में जीवाश्म का अभाव पाया जाता है ।
• इन चट्टानों के विभिन्न प्रकार के धात्विक व अधात्विक खनिजों की प्रधानता होती हैं ।
• ग्रेनाइट, गैब्रो, बेसाल्ट आदि प्रमुख अग्नेय चट्टानें हैं ।
अवसादी चट्टानें -
• इन चट्टानों में व्यवस्थित परतें पाई जाती हैं । इनका निर्माण अपरदन के कारण तथा नदियों आदि के द्वारा बहा कर लाए गए पदार्थों के जमाव एवं उनके लंबे समय में संगठित होने के परिणाम स्वरुप होता है ।
• इन चट्टानों में जीवाश्म भारी मात्रा में पाए जाते हैं
• इन चट्टानों में धात्विक खनिज का अभाव पाया जाता है । खनिज तेल इन्हीं चट्टानों से प्राप्त होते हैं ।
• बलुआ पत्थर, कांग्लोमेरेट, चूना पत्थर, डोलोमाइट, ने, कोयला आदि परतदार या अवसादी चट्टान के उदाहरण हैं ।
• ये चट्टाने रवेदार, छिद्रयुक्त, दरार आदि लक्षणों से युक्त होती हैं ।
रूपांतरित चट्टानें -
• अत्यधिक ताप अथवा दाब के कारण विघटन की अनुपस्थिति में चट्टानों की भौतिक एवं रासायनिक संरचना में होने वाले परिवर्तन के फलस्वरूप रूपांतरित चट्टानों का निर्माण होता है ।
• रूपांतरण से चट्टानों के घनत्व, कठोरता, बनावट, रंग, तथा खनिजों की संरचना में पूर्ण या आंशिक परिवर्तन दर्ज होता है ।