1919 का वर्ष भारत के लिए अत्यंत सोच एवं असंतोष का वर्ष था। देश मे फैल रही राष्ट्रीयता की भावना तथा क्रांतिकारी गतिविधियों को कुचलने के लिए ब्रिटेन को पुनः शक्ति की आवश्यकता थी क्योंकि भारत के रक्षा अधिनियम की शक्ति समाप्त प्राय थी। इसी संदर्भ में सरकार ने सिडनी रोलेट की नियुक्ति की,जिन्हें इस बात की जांच करनी थी कि भारत मे क्रांतिकारी गतिविधियों के माध्यम से सरकार के विरूद्ध खड़यंत्र करने वाले लोग कहाँ तक फैले हुए हैं और उनसे निपटने के लिए किस प्रकार के कानूनों की आवश्यकता है। इस संबंध में रोलेट की समिति ने जो सिफारिश की, उन्हें ही रोलेट एक्ट के नाम से जाना जाता है। इस एक्ट के अंतर्गत एक विशेष न्यायालय की स्थापना की गई,इसके निर्णय के विरुद्ध कही अपील नही की जा सकती थी।प्रांतीय सरकारों को बिना वारंट गिरफ्तार , तलाशी ,तथा बंदी बनाने का अधिकार था।