साख पर सवाल

चर्चा और विवाद उसके लिए कोई नई चीज नहीं है इन दोनों के बीच में कई बार उसका भाषा मजाक भी उड़ता रहा है देश की सर्वोच्च जांच एजेंसी केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई का नाम पिछली बार चर्चा में तब आया था। जब सुप्रीम कोर्ट ने उसे पिंजरे का तोता कहा था एक ऐसी संस्था जो अपने मालिक के सुर में ही बोलती है ।लेकिन अब जब सीबीआई के दो आला अफसरों में भिड़ंत होती दिख रही है तो दिख रहा है कि तोते के कुछ अपने सुरभि हैं जो एक दूसरे के खिलाफ गिरते समय ही सुनाई देते हैं इसलिए बाद सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ने सीबीआई की विश्वसनीयता पर जो सवाल उठाए थे। नए विवाद ने उससे कहीं ज्यादा गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं एक तरफ सीबीआई ने अपने ही विशेष निदेशक के खिलाफ घूस लेने के गंभीर आरोप लगाते हुए बकायदा रिपोर्ट दर्ज करा दी है तो दूसरी तरफ आरोपी विशेष निदेशक सीबीआई निदेशक के खिलाफ घूस लेने के आरोप पहले ही लगा चुके हैं दिलचस्प बात यह है कि घूस लेने के आरोप एक ही मामले में लगे हैं ।अभी आप बता पाना मुश्किल है। कि इन आरोपों में कितना सच है कितना है और कितना पढ़ाई का स्तर पर जाना है। हो सकता है कि आगे भी सामने ना आ पाए लेकिन मामला अगर जारी रहा तो इस संस्था की बची खुची विश्वसनीयता भी द्ध्वस होने की  तरफ बढ़ चलेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने सीबीआई को पिंजरे का तोता कहा था एक ऐसा तथ्य सामने आया था। जिसे हर कोई पहले ही समझता था जिस से देश में रामधन आ रही है कि सीबीआई सरकार की भाषा ही बोलती है। खासकर राजनीतिक मामलों में सरकार और सत्ताधारी दल के लोगों को बचाने की कोशिशें होती है जबकि विरोधी दल वालों को फसाया जाता है। सीबीआई सही अर्थों में स्वायत्त संस्था नहीं है इसलिए इस पर हमें अक्सर हैरत नहीं होती। इस सच को जानते समझते हुए हम यही उम्मीद करते हैं कि आपराधिक मामलों में सीबीआई पेशेवर ढंग से जांच करती होगी और अपराधियों को कटघरे तक पहुंच आती होगी।

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