प्रतिभाओं की नई मंजिल

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की नीतियों का असर अब दूर तक दिखने लगा है उनकी h1b वीजा नीति से खड़ी हुई समस्याओं ने भारत की इंडियन इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी में दस्तक दे दी है। देशभर के आईआईटी में नवंबर का महीना केंपस सिलेक्शन का समय होता है दुनिया भर की बड़ी बड़ी कंपनियां इस समय आईआईटी में जाकर प्रतिभाशाली छात्रों की भर्ती कर दी हैं वैसे तो इस केंपस सिलेक्शन में अमेरिकी कंपनियों की भूमिका इसलिए कुछ साल से लगातार घट रही है।

हालांकि अमेरिकी कंपनियां यहां आ रही हैं पहले के मुकाबले कम भर्ती कर रही हैं लेकिन इस साल समस्या को ज्यादा गंभीर होती नजर आ रही है बी वीजा नीति के चलते ज्यादातर अमेरिकी कंपनियां स्पष्ट करने से कतरा रही है कि भर्ती होने वाले युवाओं की तैनाती कहां होगी। आईआईटी मुंबई से आई खबरों के अनुसार अमेरिकी कंपनियों में सिर्फ माइक्रोसॉफ्ट ही ऐसी है जिसमें स्पष्ट किया है कि भर्ती किए गए लोगों की तैनाती उसके मुख्यालय रेडमंड  मैं होगी बाकी ने अपने जाप अनाउंसमेंट फार्म में इसे गोल मोल कर दिया है माना जा रहा है कि जिन लोगों की भर्ती हो रही है। हो सकता है कि उनमें से कुछ की तैनाती शुरू में अमेरिका के बाहर कहीं की जाए आईआईटी में इस साल बड़े पैमाने पर भर्ती करने वाली अमेरिकी कंपनियों में माइक्रोसॉफ्ट के बाद टैक्सी क्रिकेटर उबर का नाम प्रमुख है दिलचस्प यह है कि जिस समय आईआईटीके केंपस सिलेक्शन में अमेरिकी कंपनियों की भूमिका कम हो रही है। चीन की कंपनियों की भूमिका बढ़ रही है इस साल वहां पहुंची चीनी कंपनियों में सबसे चर्चित नाम मोबाइल फोन बनाने वाली कंपनी का है। चीन की कंपनियों की बढ़ती भूमिका एक तरफ से यह भी बता रही है कि तकनीक का कारोबार का विश्व संतुलन अब किधर जा रहा है। हालांकि चीन की कंपनियों की सक्रियता तेजी से बढ़ रही है पर भारतीय से बड़े पैमाने पर भर्तियां जापान की कंपनियां ही कर रही हैं वैसे हर बार की तरह इस बार यूरोप कनाडा और सिंगापुर की कंपनी है पर आया जापान की तुलना में उनकी भूमिका बहुत ज्यादा नहीं है किस देश की कौन सी कंपनी कितनी भर्ती कर रही है। इसकी पूरी जानकारी अमूमन दिसंबर में ही मिल पाती है जब आईआईटी केंपस सिलेक्शन के आधिकारिक आंकड़े जारी कर दी है अभी जो सूचनाएं हैं। आमतौर पर कंपनियों या छात्रों से मिल रही है।

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