सबसे बड़ा कर्जदार

एक पुराना चुटकुला है अगर आप की देनदारी ₹100000 है तो आप कर्जदार हैं अगर आप की देनदारी 10000000 रुपए हैं आप व्यापारी हैं अगर देनदारी एक अरब रुपए है तो आप उद्योगपति हैं और अगर यह ₹1000 अरब रुपए हैं तो आप सरकार हैं।

यानी आप की सत्ता कितनी बड़ी है या इस पर निर्भर करता है कि आप पर कर्ज कितना है इसका एक अच्छा उदाहरण अमेरिका है वह दुनिया की सबसे बड़ी ताकत ही नहीं दुनिया का सबसे बड़ा कर्जदार भी है अमेरिका सरकार पर कुल कितना कर्ज है। हाल फिलहाल के आंकड़ों के हिसाब से अमेरिका पर कुल कर्ज 271 अरब डालर है जो लगातार बढ़ रहा है इसको इस तरह से भी समझा जाता है कि अगर एक $1000 के नोट एक के ऊपर एक रखे जाएं तो इस रकम की कुल ऊंचाई 1400 मील होगी और अगर इसकी जगह एक $1 के नोट रखे जाएं तो चांद तक पहुंच जाएगा। एक दूसरी तरफ से इसे ऐसे भी समझ सकते हैं कि अमेरिका का कर्ज़ एक अमेरिकी नागरिक हजार डाला है उस दिन पहले कुछ अर्थशास्त्रियों ने इस पर एक दिलचस्प चर्चा की विशाखा की अगर किसी वजह से अमेरिका इस कर्ज को चुकाने से इनकार कर दे तो क्या होगा या उसकी हालत इतनी खस्ता हो जाएगी वह चुकाने की स्थिति में ही ना रह जाए तो क्या होगा दोनों ही चीजें असंभव सी लगती है। आशाओं की चर्चा भी ज्यादा होती है उसमें असंभव का ऐसा नहीं कि कोई ऐसी चीज है जो दुनिया में कभी हुई ही नहीं दुनिया के बहुत से ऐसी स्थिति में आ गए हैं जहां भी कर चुकाने की हालत में नहीं रह गए दिल हार हमारे पड़ोसी पाकिस्तान की यही हालत है। वह भी सुबह से लेकर मुद्रा कोष कई संस्थाओं का नहीं रह गया है और उसे आर्थिक संकट से उबारने की तैयारियां चल रही हैं और जैसे देश भी इस स्थिति में फंस चुके हैं जल्द ही गए लेकिन अमेरिका का मामला इतना सरल नहीं है।

अमेरिका की अर्थव्यवस्था डूबती है तो कोई संस्था या देश इस स्थिति में नहीं है कि इतनी बड़ी आर्थिक ताकत वाले देश को संकट से उबार पाए सच यह है कि अमेरिका की अर्थव्यवस्था के डूबने का अर्थ होगा पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था का डूब जाना सबसे बड़ा प्रभाव होगा। कि पूरी दुनिया की वित्त व्यवस्था ही डूब जाएगी क्योंकि अमेरिका ही दुनिया के बीच बाजार की दूरी है दुनिया भर की ब्याज दरों से लेकर निवेश का भूगोल उसी की विधि नीतियों से होता है। पूरी दुनिया के लोगों पर पड़ने वाले असर इतने बड़े होंगे कि शायद हम अभी उसकी ठीक से कल्पना भी नहीं कर सकते सबसे पहले तो उद्योग बंद होंगे और बेरोजगारी बहुत तेजी से बढ़ेगी। जो उद्योग चल रहे होंगे हो सकता है कि वह कर्मचारियों को ठीक से वेतन देने की स्थिति भी ना रहे जिन्हें पूरा वेतन मिल भी रहा होगा उनकी स्थिति बहुत अच्छी नहीं होगी महंगाई इतनी ज्यादा बढ़ जाएगी कोई भी वेतन वृद्धि होगी यह सारे अनुमान है जो अर्थशास्त्रियों ने लगाए हैं। अमेरिकी अध्यक्ष का कहना है कि किसी भी सूरत में या नहीं आएगी भी यही उम्मीद बानी चाहिए।

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