भारत सरकार अधिनियम 1935 । भाग 3 ।

अखिल भारतीय संघ की स्थापना :-

यह 11 ब्रिटिश प्रांतों 6 कमिशनरियों तथा उन देसी रियासतों, जो स्वेच्छा से इनमें शामिल हो, से मिलकर बनना था । ब्रिटिश प्रांतों के लिए संघ में शामिल होना आवश्यक था । देसी रियासतें संघ में शामिल नहीं हुए अतः यह प्रस्ताव मूर्त रूप ना ले सका । यद्यपि अखिल भारतीय संघ अस्तित्व में नहीं आ सका किंतु 1 अप्रैल 1937 को प्रांतीय स्वायत्तता लागू कर दी गई ।

केंद्र में द्वैध शासन:-

1919 के अधिनियम द्वारा प्रांतों में स्थापित द्वैध शासन इस अधिनियम द्वारा समाप्त कर दिया गया तथा उसे केंद्र में लागू किया गया । केंद्रीय प्रशासन के विषयों को रक्षित तथा हस्तांतरित में वर्गीकृत किया गया । 'रक्षित' विषयों (प्रतिरक्षा, विदेशी मामले, धार्मिक विषय, व जनजाति क्षेत्र आदि) का प्रशासन गवर्नर जनरल अपनी परिषद की सहायता से करता था तथा अपने कार्यों के लिए, भारत सचिव के माध्यम से ब्रिटिश सरकार के प्रति उत्तरदायी था । हस्तांतरित विषयों का प्रशासन गवर्नर जनरल अपनी मंत्रिपरिषद की सहायता से करता जो विधानसभा के प्रति उत्तरदाई थी ।

प्रांतीय स्वायत्तता :-

प्रांतों में स्वायत्त शासन की स्थापना इस अधिनियम की एक महत्वपूर्ण विशेषता थी । विधि निर्माण हेतु वर्गीकृत केंद्रीय और प्रांतीय विषयों में से प्रांतीय विषयों पर विधि बनाने का अत्यांतिक अधिकार प्रांतों को दिया गया तथा उन पर से केंद्र का नियंत्रण समाप्त कर दिया गया । प्रांतों के गवर्नर ब्रिटिश सरकार के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करते थे ना कि गवर्नर जनरल के अधीन । 

         लेख अभी जारी है ......

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