भारत सरकार अधिनियम 1935 । भाग 4 ।

संघीय न्यायालय की स्थापना :-

यह दिल्ली में स्थित था । इसमें मुख्य न्यायाधीश तथा अधिकतम 7 अन्य न्यायाधीश हो सकते थे । इनकी नियुक्ति सम्राट द्वारा की जाती थी । उसके निर्णय के विरुद्ध अपील प्रिवीं काउंसिल में की जा सकती थी । 1 अक्टूबर 1937 से न्यायालय कार्यरत हो गया । इसके प्रथम मुख्य न्यायाधीश सर मौरिस ग्वेयर थे ।

शक्तियों का विभाजन :-

1935 के अधिनियम द्वारा केंद्र एवं प्रांतों के मध्य शक्तियों का विभाजन 3 सूचियों में जैसे - संघ सूची (59 विषय) प्रांतीय सूची (54 विषय), समवर्ती सूची (36 विषय) में किया गया था । अवशिष्ट विषयों सहित कुछ आपातकालीन अधिकार वायसराय को सौंपा गया था ।

• 11 प्रांतों में विधान सभा का गठन किया गया । 6 प्रांतों में द्विसदनीय विधानमंडल की स्थापना की गयी । उच्च सदन, विधान परिषद एक स्थाई सदन था । निम्न सदन विधानसभा थी ।
• ‎संघीय तथा प्रांतीय व्यवस्थापिकाओं में सांप्रदायिक निर्वाचन पद्धति का विस्तार कर उसमें आंग्ल भारतीय ईसाइयों, यूरोपियों एवं हरिजनों को भी शामिल कर दिया गया ।
• ‎किस अधिनियम द्वारा भारत परिषद का अंत कर दिया गया ।
• ‎1937 का विधानसभा चुनाव इस अधिनियम के लागू होने के परिणाम स्वरुप हुआ ।
• ‎इस अधिनियम द्वारा 1935 ईस्वी में बर्मा को भारत से अलग कर दिया गया ।
• ‎भारत शासन अधिनियम, 1935 के अधीन फरवरी, 1937 में 11 प्रांतों में प्रांतीय विधान मंडलों के चुनाव कराए गए । चुनाव में कांग्रेस को भारी सफलता प्राप्त हुई और उसने 6 प्रांतों (मद्रास, बिहार ,उड़ीसा, मध्य प्रांत, संयुक्त प्रांत और मुंबई) में अपनी सरकार बनायी । पश्चिमोत्तर सीमा प्रांत एवं असम में भी कांग्रेस ने मिली जुली सरकार बनायी । कुल 3 प्रांतों (पश्चिमोत्तर सीमा प्रांत, असम तथा सिंध) में मिलीजुली सरकार गठित की गई थी । पंजाब में यूनियनिस्ट पार्टी तथा बंगाल में कृषक प्रजा पार्टी की सरकार का गठन हुआ था ।

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