भारतीय न्यायपालिका

हमारे देश मे लिखित संबिधान की व्याख्या, केंद्र एवं राज्यों के बीच समन्वय तथा मौलिक अधिकारों की रक्षा के निमित्त एक स्वतंत्र न्यायपालिका का गठन किया गया है।जाहिर है कि उस दृष्टि से न्यायपालिका की भूमिका भारत मे न्याय करने से लेकर मूल अधिकारों की रक्षा और सरकार के विभिन्न अंगों को अपने निर्धारित कार्य क्षेत्र में रहने के लिए निर्देशित करने तक विस्तृत है। भारत मे उच्चतम न्यायालय न सिर्फ संबिधान की रक्षा करता है बल्कि किसी भी सरकार अथवा शक्ति द्वारा उसका उलंघन किये जाने से भी रोकता है।

लेकिन पिछले कुछ समय से बदलती राजनीतिक, सामाजिक परिस्थितियों के मद्देनजर देश की न्याय व्यवस्था के स्वरूप में क्रांतिकारी परिवर्तन आया है। आज न्यायपालिका सिर्फ न्याय प्रदान करने का कार्य नही कर रही बल्कि एक प्रशासक , सुधारक, और नीति निर्धारक की भूमिका भी अदा कर रही है, जो मूल रूप से कार्यपालिका के कार्य क्षेत्र में आते है। इसी स्थिति में , जबकि न्यायपालिका द्वारा कार्यपालिका की शक्तियों का प्रयोग किया जाता है, न्यायिक सक्रियता कहलाता है।

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