ब्रिटिस काल
1793 -बंगाल में स्थायी बन्दोबस्त लागू
1806-भारत में पत्र-मुद्रा (पेपर करेंसी) का चलन आरम्भ हुआ।
1820-भारत की अर्थव्यवस्था चीन और यूके के बाद तीसरे स्थान पर आ गई। ब्रिटेन द्वारा भारत के औपनिवेशिक शोष्ण तथा ब्रिटेन में औद्योगिक क्रान्ति के परिणामस्वरूप यूके अर्थव्यवस्था की दृष्टि से पहली बार यूरोप में भी सबसे आगे पहुँच गया। अब ब्रिटेन की विदेश नीति तथा आर्थिक नीति में भारत को असमान भागीदार के रूप में व्यवहार किया जाना आरम्भ हुआ।
1850- में भारत की सकल घरेलू उत्पाद घटकर 5-10% रह गया। यह चीन के सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 40 अनुमानित था। 1850 तक भारत के 30 प्रतिशत बाजार पर ब्रिटेन के कपास का कब्जा हो गया।
आजादी के बाद-
1948-प्रथम औद्योगिक नीति घोषित की गयी।
1949-1 जनवरी को भारतीय रिजर्व बैंक का राष्ट्रीयकरण हुआ।
रूपये का अवमूल्यन
1952-विश्व अर्थव्यवस्था में भारत का हिस्सा 3.8% था।
1956-द्वितीय औद्योगिक नीति की घोषणा
1962-चीन का भारत पर आक्रमण
1965-पाकिस्तान के साथ भारत का युद्ध
1966-रूपए का अवमूल्यन करना पड़ा
1969-राजाओं-नवाबों के प्रिवीयर्स एवं विशेषाधिकार की समाप्ति।